यामी गौतम ने कंगना-रितिक के विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर लिखा खुला पत्र

मुंबई। फिल्म काबिल में रितिक रोशन के साथ उनकी हीरोइन के तौर पर काम कर चुकी यामी गौतम ने कंगना के साथ जारी विवाद में उनका समर्थन किया है। फरहान अख्तर के बाद यामी गौतम ने इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में यामी गौतम का कहना है।

yami goutam
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बता दें कि वैसे तो मैं सोशल मीडिया पर ज्यादा टिका टिप्पणी नहीं करती हूं लेकिन आज मैं कुछ कहना चाहूंगी क्योंकि एक महिला के तौर पर मैं जो देख रही हूं, वो मुझे बहुत डराता है। ये लैटर इंडस्ट्री के दो बड़े स्टार्स के बीच चल रहे विवाद को लेकर है। खुशकिस्मती से इनमें से एक के साथ मुझे काम करने का अवसर मिला। लेकिन मैं ये एक दोस्त या को-स्टार के तौर पर नहीं लिख रही हूं। मैं ये पत्र एक औरत और देश की नागरिक होने के तौर पर लिख रही हूं। मैं अपनी बात को संक्षेप में और यथासंभव निष्पक्ष तरह से रखने की कोशिश करूंगी।

मैं लीगल एक्सपर्ट नहीं हूं और मैं इस मामले के विवरणों के बारे में नहीं जानती। मैं केवल मीडिया में रिपोर्ट की जा रही बातों के बारे में जानती हूं। मैं सच्चाई भरी रिपोर्टिंग के समर्थन में हूं। किसी तरह से ये विवाद अब एक जेंडर वॉर में बदल चुका है, जहां सोसाइटी के एक हिस्से ने आदमी को पहले ही दोषी ठहरा दिया है। लोगों ने सोच लिया कि क्योंकि वो आदमी दोषी हैं क्योंकि ऐसा ही तो होता आया है। आदमियों ने औरतों को कई दशकों से दबा कर है और इस केस में भी ऐसा ही सोचा जा रहा है।

बता दें कि मेरे ख्याल से ये खतरनाक है। जो भी हुआ, दोषी साबित होने तक हर कोई निर्दोष रहता है और कानून को अपना फैसला करने देना चाहिए। कई बार इस देश में हम अक्सर न्याय पाने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं. पुलिस इस मामले की तहकीकात करती है और इस मामले में तो दोनों ही पक्ष इतने सक्षम हैं कि अदालत में वे अपना प्रतिनिधित्व कर सकते हैं और कानूनी तौर पर इस मामले को सुलझा सकते हैं।

वहीं दुखद ये है कि हमारी कानून और व्यवस्था एक तरह की क्लासिस्ट है, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे। इस तरह से किसी सबूत पर विश्वास रखकर किसी आदमी को गाली देना खतरनाक है। यदि जेंडर कार्ड का इस्तमाल न करके निष्पक्ष तरीके से इस मामले की सुनवाई हो तो विपरीत लिंग की महिलाओं को आदमियों के बराबरी में लाने वालों के प्रयासों को एक झटका लगेगा।

वहीं अगर मीडिया द्वारा इस बेबुनियादी ट्रायल को इसी तरह चलने दिया गया, जहां सिर्फ एक पार्टी को दोषी माना गया है तो फिर जल्द ही लोगों का देश के उन सभी आंदोलनों से विश्वास उठ जाएगा जो पिछले कुछ सालों के दौरान न्याय पाने के लिए किए गए हैं। मैं यहां किसी को दोषमुक्त कराने की कोशिश नहीं कर रही हूं। मैं किसी भी एक पार्टी द्वारा द्वेष की सलाह भी नहीं दे रही हूं। मैं बस इतना कह रही हूं कि इसे दो जेंडर्स के बीच का झगड़ा न बनाया जाए। आइए, इसे दो लोगों के बीच की एक ऐसी लड़ाई रहने दें, जिनका अतीत में पत्राचार न हुआ हो।

साथ ही इस मामले की सभी बातों को सामने आने दिया जाए और तब तक हम अपने फैसलों को सुरक्षित रखें। बस क्योंकि एक आदमी और औरत के बीच की लड़ाई है इसका ये मतलब नहीं कि ये दो जेंडर्स के बीच की लड़ाई है. इसी तरह हर मुद्दे को दो जेंडर के बीच की लड़ाई बनाने से समाज में इस तरह के सेक्सिस्ट इश्यूज से निपटते समय हमारा ध्यान भटक जाता है. ऐसी इश्यूज जो हमारे समाज को प्लेग की तरह ग्रसित करते हैं।