माता महागौरी की आराधना से कुंवारी कन्या को मिलता है इच्छित वर

नई दिल्ली। नवरात्र में माता के भक्त माता के आठवें रूप में नवदुर्गा के महागौरी स्वरूप का पूजन करते हैं। माता का ये स्वरूप अर्थी पर सवार मृत महिला और पुरूष का है जो खपन ओढ़े पड़ा हो। महागौरी का शाब्दिक अर्थ महान देवी जिसके तेज से संपूर्ण श्रृष्टि प्रकाशित हो इनकी शक्ति अमोघ फलदायिन हो। पुराणों की माने तो माता के अंश से देवी कौशिकी का जन्म हुआ। देवी कौशिकी ने शुभ-निशुंभ का संहार किया है। माता गौरी देवों के देव महादेव की अर्धांगिनी हैं माता शिवा और शांभवी का स्वरूप हैं।

माता की छटा चांदनी के समान श्वेत है माता गौर वर्ण का शरीर लिए श्वेत वस्त्र पहने श्वेत वृष पर सवार एक हाथ में अभय मुद्रा से भक्तों के मनोरथ को पूर्ण होने का आशीर्वाद दे रही हैं। दूसरे हाथ से सिद्धि का वरदान एक हाथ डमरू तो नाद से दूसरे हाथ में त्रिशूल से दुष्टों का संहार। ज्योतिष शास्त्र की माने तो माता का संबंध छाया गृह राहु से हैं। कुंडली में राहु ग्रह का संबंध हमारे छठे और आठवें भाव से होता है। माता महागौरी की आराधना से शत्रुनाश, रोगनाश, दांपत्य, विवाहबाधा, गृहस्थी और आयु से संबंधित सभी बाधाएं दूर होती हैं।

माता के निवास की दिशा नैत्रिग्य है । माता की आराधना करने से सभी कष्टों से आराम मिलता है। इसके साथ ही जिन लोगों की जीविका शेयर मार्केट, पुलिस और सुरक्षा की सेवा से जुड़ी है। उनके लिए माता महागौरी की आराधना फलदायी है। माता महागौरी का कुंवारी कन्याओं को पूजन करना लाभदायक माना जाता है। इससे इच्छित वर की प्राप्ति होती है। माता महागौरी की आराधना से मन पवित्र हो जाता है और सभी मनोकामनाएं की पूर्ति हो जाती है। माता की आराधना के लिए इस मंत्र श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा का 108 बार जाप करना लाभकारी होता है।