बलूचिस्तान पर मोदी की सुने दुनिया: बलूच कार्यकर्ता

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान के ‘मानवीय संकट’ का जिक्र कर काफी ‘बड़ा कदम उठाया है’ और अब दुनिया के अन्य नेताओं को भी पाकिस्तानी प्रांत में जारी ‘नरसंहार’ और ‘जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ अभियान’ के विरोध में आवाज उठानी चाहिए। यह कहना है बलूच आजादी अभियान के एक प्रमुख कार्यकर्ता का।

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बलूचिस्तान के मुद्दों से जुड़े अभियान के लिए दिल्ली में रह रहे मुठ्ठीभर बलूच लोगों और भारतीयों का समर्थन हासिल करने की आस में यहां आए मजदाक दिलशाद बलूच का कहना है कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। मजदाक (25) ने आईएएनएस से कहा, “दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री ने एक ऐतिहासिक स्थल पर और एक ऐतिहासिक दिन बलूचिस्तान के मानवीय संकट के बारे में बात करके इस अभियान में प्रमुख भूमिका निभाई है। यह एक बड़ा कदम है और हम जानते हैं कि अन्य नेता भी इस राह पर चलेंगे।”

दिग्गज लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता नाएला कादरी बलूच और फिल्मकार मीर गुलाम मुस्तफा रायसैनी के बेटे मजदाक निर्वासन में कनाडा में अपने दो भाइयों और पत्नी के साथ रहते हैं। वर्ष 2010 में पाकिस्तान से भागकर अफगानिस्तान पहुंचने के बाद उनके परिवार को मारने की कई कोशिशें की गई थीं, जिसके बाद 2014 में उन्हें और उनके परिवार को कनाडा ने शरण दी। मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में कश्मीर का मुद्दा बलूचिस्तान से अलग कैसे है और कश्मीर पर पाकिस्तान की काट के लिए भारत बलोच कार्ड का इस्तेमाल कर रहा है, इस धारणा के बारे में पूछे जाने पर मजदाक ने कहा, “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जबकि बलूचिस्तान एक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा है।”

उन्होंने कहा कि कश्मीर ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से सैकड़ों वर्षो से भारत का हिस्सा रहा है। यह कभी भी आजाद देश नहीं था, जबकि बलूचिस्तान था। इसकी अपनी संसद, हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स थे। वहां शासन के लिए राजा था, लेकिन वह खुद फैसले नहीं ले सकता था। मजदाक ने कहा, “हमारे देश पर कब्जा है, जिसका 700 वर्षो का राजतंत्र का इतिहास रहा है। पंजाब प्रांत की तरह यह पाकिस्तान की आंतरिक समस्या नहीं है, यह एक अंतर्राष्ट्रीय समस्या है।”

मजदाक को उम्मीद है कि भारत और अन्य ‘मानवतावादी देश’ ‘बेजुबान बलूचिस्तान’ के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाएंगे और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध के माध्यम से पाकिस्तान पर दबाव बनाएंगे। उन्होंने कहा, “चाहे अरब देश हों, उत्तरी अमेरिका, यूरोपीय संघ या ब्रिटेन हो, दुनिया भर की सभी शक्तियों को पाकिस्तान को समर्थन देना बंद करना होगा और बलूचिस्तान में जारी अत्याचारों और नरसंहार को लेकर पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाना होगा।”

पश्चिमी पाकिस्तानी प्रांत बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सनाउल्लाह खान जेहरी के इस दावे को खारिज करते हुए कि मोदी के बयान के बाद बलूचिस्तान में भारत विरोधी प्रदर्शन हुए हैं, मजदाक ने कहा कि यह सब ‘राज्य प्रायोजित नाटक था।’

उन्होंने कहा, “बलूच लोग कभी भी ऐसे किसी प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेते। यह बेहद छोटे से हिस्से में किया गया था। यह सब राज्य प्रायोजित नाटक था। उन्होंने हजारा, पश्तूनों और पंजाबी लोगों को इस तथाकथित विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए पैसे दिए थे।”

बलूचिस्तान पर अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के रुख का स्वागत करते हुए मजदाक ने कहा, “वह बलूचिस्तान में रह चुके हैं, इसलिए वह हमारी समस्याएं समझ सकते हैं। हम उनके बयान का स्वागत करते हैं। हमें अब उम्मीद है कि वर्तमान राष्ट्रपति अशरफ गनी आधिकारिक तौर पर बलूच मुद्दे पर अफगानिस्तान का रुख स्पष्ट करेंगे।”

मजदाक की मां नाएला कादरी बलूच ने कुछ महीने पहले इस्लामाबाद के इन आरोपों का खंडन किया था कि भारत वहां अलगाववादी समस्याएं पैदा कर रहा है। उन्होंने साथ ही इस मसले में भारत से दखल देने को कहा था। मजदाक ने आईएएनएस से कहा, “कश्मीर भारत की आतंरिक समस्या है। पाकिस्तान ने यहां शांति प्रक्रिया में व्यवधान डालने के लिए हमेशा अपनी टांग अड़ाई है। बातचीत को लेकर पाकिस्तान, भारत को मूर्ख बनाता रहा है। यह देश शांति के वास्तविक मुद्दे पर बात करने के लिए कभी वार्ता की मेज पर नहीं आएगा।”

मजदाक ने कहा, “भारत के विपक्ष और नागरिक समाज को अपने प्रधानमंत्री के सही रुख का समर्थन करना चाहिए। बलूचिस्तान के लोग नरेंद्र मोदी और भारत के आभारी हैं।”