सेंसर बोर्ड के अधिकारों को कम करने के लिए मसौदे पर काम शुरू

मुंबई। सेंसर बोर्ड के साथ फिल्मों के लगातार बढ़ते जा रहे विवादों को देखते हुए अब केंद्र सरकार हरकत में आई है और सरकारी स्तर पर संकेत मिल रहे हैं कि सेंसर बोर्ड के अधिकारों को कम करने के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय सिनेमाटोग्राफी एक्ट में बदलाव के लिए मसौदा तैयार कर रहा है, जिसमें सेंसर बोर्ड के अधिकारों को फिर से तय किया जाएगा।

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सूत्रों का कहना है कि इस मसौदे में सेंसर बोर्ड को सिर्फ इतना ही अधिकार होगा कि तय नियमानुसार फिल्मों को सार्टिफिकेट जारी करें। कहा जा रहा है कि सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्मों के सीनों और संवादों में कुछ भी कट करने के अधिकार को समाप्त किया जा सकता है। सेंसर बोर्ड में इस बदलाव की गूंज इस खबर के साथ अहम हो जाती है कि पहलाज निहलानी के नेतृत्व वाले सेंसर बोर्ड ने केंद्र सरकार और भाजपा के काफी करीबी माने जाने वाले मधुर भंडारकर की फिल्म ‘इंदु सरकार’ को 17 कट्स दिए, जिससे मधुर निराश और दुखी हुए और उन्होंने इन कटस को लेकर सेंसर का आदेश मानने से मना कर दिया।

सूत्र बता रहे हैं कि मधुर ने उनकी फिल्म को लेकर सेंसर के रवैये की शिकायत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से की, जिनके दखल के बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय को इस मसौदे पर काम करने को कहा गया है। केंद्र सरकार ने कुछ समय पहले बॉलीवुड के वरिष्ठ फिल्मकार श्याम बेनेगल के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में सरकार से सेंसर के अधिकारों और कार्यशैली की समीक्षा करने का सुझाव दिया था। सरकार ने इस कमेटी की रिपोर्ट को भी गंभीरता से लिया है। इस कमेटी का मानना है कि सेंसर की जिम्मेदारी कैटेगिरी के हिसाब से फिल्मों को सार्टिफिकेट जारी करने तक सीमित होनी चाहिए।

पहलाज निहलानी के सेंसर बोर्ड के साथ हाल ही में मधुर भंडारकर की फिल्म ‘इंदु सरकार’ के अलावा शाहरुख खान की फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’, प्रकाश झा की फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ और रामगोपाल वर्मा की ‘सरकार 3’ के विवाद मीडिया में छाए रहे। पहलाज निहलानी ने सेंसर बोर्ड के अधिकारों में कटौती को लेकर कोई प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है।