पितृ-पक्ष में पितरों के तर्पण से खत्म होगा पितृदोष, गुरूवार से होगा तर्पण

नई दिल्ली। भारतीय जीवन धर्म और शास्त्रों में पितृरों का बड़ा ही विशेष महत्व होता है। इनके शांत और प्रसन्न रहने से जीवन में कभी कोई बाधा नहीं आती और अपार सफलता मिलती है। हिन्दू धर्म के अनुसार अपने पितरों और पूर्वजों को याद करने और उनके निमित्त पूजन करने का एक विशेष माह होता है। जिसको पितृपक्ष के नाम से जाना जाता है। इस माह में कोई शुभकाम नहीं करते हैं। साथ ही इस माह में कोई नया धंधा नहीं शुरू करते है। हांलाकि पितृपक्ष के बाद से सारे शुभकाम शुरू हो जाते हैं। इस माह में पूजा-पाठ का फल भी इंसान को नहीं मिलता है। इस माह में केवल अपने पूर्वजों का तर्पण और श्राद्ध किया जाता है।

इस बार पित्रपक्ष का ये माह मात्र 14 दिनों के लिए है। जिसकी शुरूआत बुधवार 6 सितंबर से हो गई है। लेकिन तर्पण 7 सितंबर को होगा क्योंकि आज ज्योतिषी गणना के अनुसार स्नान दान की पूर्णिमा है। ऊषा का के नक्षत्र को दिन भर के लिए माना जाता है। जिसके चलते 6 सितंबर से शुरू हुए पितृ-पक्ष की गणना 7 सितबंर से शुरू होगी। इसके साथ ही प्रतिप्रदा से शुरू होकर ये अमावस्या तिथि को समाप्त होगा।इस साल पितृ-पक्ष में दिनों की संख्या एक दिन कम है यानी ये वर्ष आपके लिए सुख लेकर आने का संकेत दे रहा है। इस बार पितृ विसर्जन 20 सितंबर को पड़ रहा है। 21 सितंबर से नवरात्रि का आरम्भ हो रहा है। जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु की तिथि की जानकारी है वो उस तिथि को श्राद्ध करेंगे। लेकिन जिनको नहीं है वो अमावस्या की तिथि को पितृ विसर्जन के दिन श्राद्ध कर दान करेंगे।

मान्यता है कि पितरों के प्रसन्न रहने से परिवार में सुख-संपदा का आगमन होता है। लोग इस माह में पंडितों से विशेष पूजा कराकर अपने पितरों को शांत करने का उपाय करते हैं। जिससे उनको पितृदोष ना लगे। इस पूजा को पूरे विधि-विधान के साथ किया जाता है। पूजन के कार्यक्रम में पंडितों द्वारा मंत्रों का उच्चारण कर पितरों के निमित्त दान आदि कराया जाता है। जो इस पूजा में जरा भी गलती करते हैं उन्हे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ता है। हमारे धर्म ग्रन्थों की माने तो इस पूजा में होने वाले पिंड दान को सिर्फ बेटा या पोता ही कर सकता है। अगर बेटा नहीं है तो भाई,भतीजा या फिर वो कर सकता है जिसका पिंड से कोई खून का संबंध हो।

आईये जानते है पितृ-पक्ष में किन बातों को खास ध्यान रखना चाहिए

पितृ पक्ष के दौरान रोज स्नान के बाद पितरों को सुबह और शाम तर्पण करना चाहिए। अगर आप ऑफिस आदि जाते हैं तो सुबह स्नान कर तर्पण कर लें। लेकिन इसके पूर्व आप को कुछ भी आहार नहीं लेना होता है। आप चाय आदि भी नहीं पी सकते हैं। पूरे पितृ-पक्ष के दौरान आपको सात्विक भोजन बिना लहसुन-प्याज का करना होगा। इसके साथ ही इस दौरान आपको मांस-मदिरा आदि के सेवन से दूर रहना होगा। पितृ-पक्ष के दौरान आपको जरूरत मंद लोगों को कपड़े बांटने चाहिए इससे आपके पितरों को शांति मिलती है। श्राद्ध का कार्य कभी दोपहर के बाद नहीं करना चाहिए इसे सुबह ही निपटाना चाहिए। श्राद्ध कर्म के बाद पितरों का तर्पण कर ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। ब्राह्मण को भोजन कराते वक्त पूरी श्राद्धा के साथ उसकी सेवा करनी चाहिए। सुबह के तर्पण के दौरान पानी के साथ चावल और तिल को मिलाकर जल देना चाहिए।