आलोचना से घिरे पेरिस समझौते को गलत बताने वाले ट्रंप

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से अलग कर लिया है। इस तरह ग्लोबल वार्मिंग से मुकाबले में अंतरराष्ट्रीय प्रयासों से अमेरिका अलग हो गया।


ट्रंप ने वाइट हाउस के रोज गार्डन में कहा हमारे नागरिकों के संरक्षण के अपने गंभीर कर्तव्यों को पूरा करने के लिए अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते से हट जाएगा। ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि जलवायु परिवर्तन को लेकर पेरिस समझौते में अमेरिकी हितों के लिए एक उचित समझौता हो। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि वर्तमान समझौते से भारत और चीन के हितों को फायदा होता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीन हाउस गैसों के पेरिस जलवायु समझौते से अलग होने की घोषणा करते हुए कहा कि इस समझौते में भारत और चीन जैसे देशों को अनुचित लाभ मिला है। उनके इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय नेताओं, कारोबारी समूहों और कार्यकर्ताओं ने तीखी आलोचना की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि यह समझौता अमेरिका के लिए अनुचित है और इससे कारोबार तथा रोजगार पर बुरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत को पेरिस समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने के लिए अरबों डॉलर मिलेंगे और चीन के साथ वह आने वाले कुछ वर्षों में कोयले से संचालित बिजली संयंत्रों को दोगुना कर लेगा और अमेरिका पर वित्तीय बढ़त हासिल कर लेगा।

वाइट हाउस के रोज गार्डन से फैसले की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें ‘पीट्सबर्ग का प्रतिनिधित्व करने के लिए निर्वाचित किया गया है न कि पेरिस का।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमेन्युएल मैक्रान ने डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते से पीछे हटने को उनकी ऐतिहासिक भूल करार दी है। उन्‍होंने जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिकों को फ्रांस में आकर काम करने के लिये आमंत्रित किया है। एक इंटरव्यू में उन्‍होंने कहा कि ट्रंप ने अपने देश के हितों के लिए बहुत बड़ी भूल की है।

आपकों बता दे कि 2 अक्टूबर गांधी जयंती के मौके पर पेरिस जलवायु समझौते का अनुमोदन किया गया था इसके साथ ही वह जलवायु परिवर्तन पर अनुमोदन संबंधी अपना दस्तावेज जमा कराने वाला 62वां देश बन गया था।