चुनाव प्रत्याशी क्यों नहीं कर रहे उर्दू में नामांकनः उर्दू विभाग

मुजफ्फरनगर। उर्दू डेवलपमेंट आर्ग0 ने मुजफ्फरनगर व शामली में विधान सभा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की निष्ठा पर सवाल खड़ा करते हुए इन्हें प्रदेश की द्वितीय राजभाषा उर्दू का दुश्मन बताया है। यू0डी0ओ0 के संरक्षक डॉ0 शमीमुल हसन और जिला उपाध्यक्ष मौलाना मूसा कासमी ने एक आवश्यक बैठक के दौरान अपना संयुक्त प्रेस नोट जारी कर कहा कि जनपद के 80 प्रत्याशियों में से किसी ने भी अपना नामांकन पत्र द्वितीय राजभाषा उर्दू में नहीं भरा है और न ही किसी उम्मीदवार ने उर्दू की वोटर लिस्ट की मांग की है जबकि राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के 146 विधानसभा क्षेत्र ऐसे है जो उर्दू बाहुल्य हैं, वहां उर्दू और हिन्दी दोनों भाषाओं में वोटर लिस्टों की प्रकाशन हुआ है और सभी पंजीकृत दलों को इसकी प्रति निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। मुजफ्फरनगर और शामली भी इस सूची में शामिल है। यू0डी0ओ0 के कोषाध्यक्ष बदरुज्जमां ख़ान ने बताया कि प्रदेश में कुल 30 प्रतिशत वोटर उर्दू भाषी हैं, जिनके हितों को ध्यान में रखते हुए उर्दू की वोटर लिस्ट का प्रकाशन कराया जाता है। मगर यहां के उर्दू भाषी प्रत्याशियों ने भी अपना नामांकन दूसरी भाषाओं में दाखिल किया है और न ही उर्दू वोटर लिस्ट की मांग की है जो बेहद निंदनीय और उर्दू जबान के साथ दुश्मनी का सबूत है। जिससे यू0डी0ओ0 और उर्दू प्रेमी आहत हैं और सभी ने फैसला किया है कि इस विधानसभा चुनाव में ‘नोटा’ का बटन दबाकर अपना विरोध दर्ज करायेंगे।

जिला सचिव यू0डी0ओ0 वकील अहमद और संयुक्त सचिव शमीम कस्सार ने कहा कि यह भी बेहद दुखद है कि किसी भी उम्मीदवार ने अपना कोई भी बैनर, पोस्टर या स्टीकर उर्दू जबान में नहीं छपवाया है, इसलिए उर्दू दां अवाम से कोई भी उम्मीदवार वोट मांगने का हक नहीं रखता है। बैठक में डॉ0 शमीमुल हसन, मौलाना मूसा कासमी, बदरुज्जमां ख़ान, वकील अहमद, शमीम कस्सार, कारी तौहीद कासमी, कारी सलीम अहमद आदि मौजूद रहे।