जानिए: क्यों खत्म हो जाती है दोबारा जन्म लेने की संभावना

नई दिल्ली। सूरज को देखना शायद आपके अनुभव को देखना ज्यादा ताकतवर होता है। अगर आप रात में उसे देखोगे तो वो आपको सबसे ज्यादा ताकतवर लगेगा और अगर आप रात में आसमान देखते हैं तो तारे आपको ज्यादा ताकतवर लगेंगे। जबकि दोनों ही एक ही है सूरज भी तारे एक तारा ही है। हालांकि ये दोनों ही आपके अनुभव में नहीं आते हैं। सूरज तारे आप और हम सभी सिर्फ छोटी-छोड़ी घटनाएं है और ये सच भी है कि हम एक क्षणिक घटनाएं है। आज के आधिनिक का कहना है कि सूरज की भी एक उम्र होती है और सूरज की ही क्यों हर चीज की एक उम्र होती है एक वक्त होता है। जो धीरे धारे खत्म हो जाती है। इसी तरह इस वक्त सूरज को भी बूखार चढ़ा है जिसकी वजह से वो खूद को जला कर खत्म कर रहा है। इस वक्त सामान्य तापमान 98.6 डिग्री फॉरेनहाईट है। जबकि सूरज का सामान्य तापमान एक करोड़ पचास लाख डिग्री सेल्सियस है। लेकिन उसकी भी एक उम्र है। वह जल रहा है और एक दिन वो जलकर राख हो जाएगा।

अंदर के शरीर को हम नहीं छू सकते

बता दें कि जिसे इंसान कहा जाता है असल में वो एक बुलबुला है। इस बुलबुले में अपना कोई अस्तित्व नहीं होता। वो एक हवा थी जिसने चारों तरफ एक आवरण बना लिया है और अचानक उसका एक खुद का गुण बन गया है। जिसमें छोटे बुलबुले होते हैं बड़े होते हैं कमजोर होते हैं जो जल्दी फूट जाते हैं। जो लोगों की तरह होते हैं। लेकिन जब भी कोई बुलबुला फूटता है तो उसके अंदर का तत्व कहां चला जाता है ये कोई नहीं जानता। उसमें हवा भरी हुई होती है और फीचने के बाद वो हवा में ही तबदील हो जाता है। इसी तरह शरीर होता है। अगर हम चाहे तो शरीर को गोली मार सकते हैं और उसे दो हिस्सों में बांट सकते हैं। जो अस्तित्व रखता है वहीं ये सब कर सकता है।

दोबारा जन्म लेने की संभावना से मुक्ति

जिसे आप अध्यात्मिक प्रक्रिया कहा जाता है वो यही है। इसे आत्मघात का गुण कहते हैं। वहीं य स्थूल शरीर की हत्या के संबंध में नहीं है। जिस तरह से आप अपने शरीर को नष्ट कर रहे हैं। आप मूलभूत ढांचे को खत्म करने की कोशिश कर रहे है जिससे एक पूरा शरीर बन सकता है। कार्मिक तत्व जो आकाशीय, प्राणिक और मानसिक शरीर के रूप में होते हैं, यह भौतिक शरीर सिर्फ इन्हीं तत्वों से बनता है। तो आप आध्यात्मिक प्रक्रिया के द्वारा उसे नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। अपनी जागरूकता के द्वारा, अपने कोशिश के द्वारा, अपने प्रेम के द्वारा, अपनी भक्ति के द्वारा, आप बस यही करने की कोशिश कर रहे हैं कि जन्म लेने की या दूसरा शरीर धारण करने की संभावना को ही नष्ट कर दिया जाए, उस नींव को ही नष्ट कर दिया जाय जिसके ऊपर एक भौतिक शरीर बन सकता है। दूसरे शब्दों में, हम रीसाइक्लिंग-बिन में बार-बार जाने की संभावना को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। माँ का गर्भ बस रीसाइक्लिंग की एक थैली है। बार बार एक ही प्रक्रिया से गुज़रना। तो हम उसे खत्म करना चाहते हैं।