हमें स्पोर्ट्स लविंग नेशन से स्पोर्ट्स प्लेइंग नेशन बनने की जरूरत-सचिन

नई दिल्ली। महान बल्लेबाज और पूर्व भारतीय कप्तान सचिन तेंदुलकर बीते गुरूवार को राज्य सभा में कांग्रेस के सदस्यों द्वारा हंगामा और शोर गुल किये जाने के कारण अपना पहला भाषण नहीं दे सके, लेकिन देशवासियों तक अपने विचार और भावनाएं पहुंचाने के लिए शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए एक वीडियो जारी किया। सचिन ने अपने वीडियो में ‘खेल के अधिकार और देश में खेल-कूद के माहौल’ तथा अपनी खेल-यात्रा के बारे में लोगों को बताया। ये बातें उनके उस संबोधन का हिस्सा थीं जो वह कल राज्य सभा में व्यक्त नहीं कर पाए।

Sachin tendulkar
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बता दें कि सचिन का कहना है कि कल कुछ चीजें थीं जो मैं कहना चाहता था। मैं इसे यहाँ करने की कोशिश करूँगा मुझे अक्सर आश्चर्य होता है कि मुझे यहाँ क्या मिला, मुझे नहीं पता था कि क्रिकेट एक बच्चे को महान बना देगा। मैं हमेशा खेलना पसंद करता था और क्रिकेट मेरा जीवन था। मेरे पिता, प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर, एक कवि और एक लेखक थे। उन्होंने हमेशा मेरी सहायता की और मैं जीवन में जो करना चाहते थे, उसे करने के लिए उन्होंने प्रोत्साहित किया। मुझे उनके पास से जो सबसे बड़ा उपहार मिला वह खेलने का अधिकार था और मैं इसके लिए उनका हमेशा कृतज्ञ रहूंगा। “

वहीं राज्यसभा सांसद ने इसके अलावा देश के अन्य मुद्दों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “हमारे देश में कई दिक्कतें हैं जिनपर ध्यान देने की आवश्यकता है। इन दिक्कतों में आर्थिक विकास, गरीबी, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य की देखभाल करना शामिल है। एक खिलाड़ी होने के नाते, मैं भारत के खेल, स्वास्थ्य और फिटनेस पर बात करने जा रहा हूं क्योंकि इससे हमारी अर्थव्यवस्था पर कथित प्रभाव पड़ता है। मेरी दृष्टि स्वस्थ और फिट भारत है।”

साथ ही उन्होंने कहा कि भारत 2020 तक दुनिया में सबसे कम औसत आयु राष्ट्र के रूप में उभरा है। इसलिए यह धारणा है कि युवा फिट है लेकिन हम गलत हैं। हम दुनिया में मधुमेह की राजधानी हैं, जिनसे 7 लाख से अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं और जब बात मोटापे की आती है, तो हम दुनिया में तीसरे नंबर पर हैं। इन सब चीजों से हमारे राष्ट्र की प्रगति बाधित हो गई है।

इतना ही नहीं तेंदुलकर ने कहा कि अब हमें स्पोर्ट्स लविंग नेशन से स्पोर्ट्स प्लेइंग नेशन बनने की जरूरत है। हमारा फिटनेस सत्र हल्का होता जा रहा हैं जबकि खाने-पीने में हम कोई समझौता नहीं कर रहे हैं। हमें इस आदत को बदलने की जरूरत है। भारत के केवल 4% आबादी वाले उत्तर-पूर्व क्षेत्र में जीवंत खेल संस्कृति है उसने दिग्गज महिला मुक्केबाज मैरी कॉम सहित कई खेल नायकों को देश को दिया है। हाल ही में मीराबाई चानू, दीपा करमाकर, बाईचुंग भूटिया, संगीता चानू और कई ऐसे खिलाड़ियों ने देश को गौरवान्वित किया है।”

वहीं अपने भाषण को समाप्त करते हुए, तेंदुलकर ने कहा, ” जहां निराशा होती है, खेल वहां आशा पैदा कर सकता है। महान नेल्सन मंडेला ने भी कहा ता कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल में खेल खेलने का अधिकार मिलना चाहिए। माता-पिता हमेशा अपने बच्चों से पूछा करते हैं कि उन्होंने क्या खाया, पढ़ाई की या नहीं, लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ा दिन होगा जब वे यह पूछने लगेंगे कि क्या उनके बच्चे दिन में खेले या नहीं।