केंद्र के सहयोग से होगा विक्रमशिला यूनिवर्सिटी का विकास

भागलपुर। राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि विक्रमशिला, नालंदा और तक्षशीला विश्वविद्यालय विद्या का असीम भण्डार हैं और यहां देश विदेश से शिक्षक और छात्र शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे। विक्रमशीला को विकसित करने को लेकर मै जल्द प्रधानमंत्री से बात करूंगा।

हमेशा से विक्रमशिला के गौरवशाली इतिहास को देखने की थी इच्छा

डॉ. प्रणव मुखर्जी ने कहा कि कॅालेज के समय से ही मेरी इच्छा थी कि मैं विक्रमशिला सहित अन्य ज्ञान अर्जन करने वाले स्थल को करीब से देखूँ। आज मुझे अवसर मिला। विक्रमशिला यूनिवर्सिटी के गौरवशाली इतिहास को देखते हुए यहाँ एक श्रेष्ठ विश्वविद्यालय की स्थापना होनी चाहिए। इसके लिए बजट में भी प्रावधान किया गया है। राष्ट्रपति ने गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे की सराहना करते हुए कहा कि सांसद विक्रमशिला को लेकर काफी प्रयत्नशील हैं। उनका प्रयास अब सफल होने लगा है। मुझे उम्मीद है कि इस क्षेत्र का जल्द ही कायाकल्प होगा।

इसके पूर्व राष्ट्रपति एयरफोर्स के तीन हेलिकॉप्टर के साथ एनटीपीसी से सुबह 10.28 बजे विक्रमशिला हैलीपैड पहुंचे। जहाँ राष्ट्रपति की अगुआई संतोष दूबे और पूर्व विधायक अमन पासवान ने पुष्प गुच्छ देकर किया। इसके बाद राष्ट्रपति प्राचीन विक्रमशिला के खुदाई स्थल गए और वहाँ भग्नावशेष का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति भग्नावशेष का बहुत ही बारीकी से अवलोकन किया साथ ही इसके इतिहास के बारे में जाना। इसके बाद राष्ट्रपति ने विक्रमशिला संग्रहालय का अवलोकन किया।

केंद्र सरकार के सहयोग से होगा विक्रमशिला यूनिवर्सिटी का विकास

इसके पूर्व सभा की शुरुआत संतोष दूबे के स्वागत भाषण के साथ हुई। सभा को संबोथित करते हुए केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी ने कहा कि केन्द्र सरकार राज्य सरकार के साथ मिलकर विक्रमशिला यूनिवर्सिटी को विकसित करने की दिशा में काम करेंगे। केंद्र सरकार इसके लिए हरसंभव सहयोग करेगी। सभा को संबोधित करते हुए गोड्डा सांसद निशाकान्त दूबे ने कहा कि प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है। यहाँ बौद्ध धर्म के साथ साथ तंत्रयान की पढ़ाई होती थी। नालंदा विश्वविद्यालय का संचालन यहाँ से हुआ करता था। इसे विकसित करने की जरूरत है। ताकि यह विश्व पटल पर अपनी पहचान बना सके। लोग इसके बारे में जानकारी लेने यहाँ आने के लिए बाध्य हों। श्री दूबे ने मंच पर मौजूद राष्ट्रपति सहित तमाम जनप्रतिनिघियों से विक्रमशिला को विकसित करने में आगे आने के अपील की।

राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा कि राष्ट्रपति का विक्रमशीला से गहरा लगाव है। इस क्षेत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना होनी चाहिए और उसका नाम विक्रमशीला विश्वविद्यालय होना चाहिए। बिहर सरकार के मंत्री ललन सिंह ने कहा कि विक्रमशीला एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। राज्य सरकार इसके उत्थान के लिए हरसंभव सहयोग करेगी। स्थानीय सांसद शैलेश कुमार उर्फ बूलो मंडल ने कहा कि आज का दिन विक्रमशीला के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। सांसद ने राष्ट्रपति से भागलपुर में उच्च न्यायालय के खंडपीठ के स्थापना की मांग की। इस अवसर राष्ट्रपति ने विक्रमशीला पर एक स्मारिका का भी विमोचन किया। सभा की शुरुआत और समापन राष्ट्रगाण के साथ हुआ।

मंच संचालन मिलिंद गुंजन ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी ने किया। मंच पर बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद, केन्द्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनाज हुसैन, गोड्डा भाजपा सांसद निशिकांत दूबे, स्थानीय आरजेडी सांसद बबूलो मंडल, कहलगांव विधायक सदानंद सिंह और रामविलास पासवान मौजूद थे।