यूरोप की तर्ज पर विदेशी सैलानियों को आकर्षित करेगी देवभूमि

देहरादून। नई सरकार बनते ही प्रदेश में विकास कार्यों में तेजी देखने को मिल रही है। एक के बाद एक प्रदेश सरकार पुरानी सरकारों द्वारा किए गए कामों की समीक्षा कर रही है और पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक के बाद एक सकारात्मक कदम उठा रही है। दरअसल उत्तराखण्ड हर साल हजारों पर्यटकों को पहाड़ों और झरनों के जरिये अपनी ओर आकर्षित करता है।

साल के चंद महीने ही सही प्रदेश में विदेशी सैलानियों का तांता लगता है लेकिन रास्ते खराब होने और परिवहन पर्यापत साधन उपलब्ध ना होने के कारण वो ज्यादा घूम नहीं पाते हैं। या यूं कहें कि वादियों का लुत्फ नहीं उठा पाते हैं। विदेशी सैलानियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर जल्द ही प्रदेश में यूरोप की तर्ज पर रोपवे व फनिक्युलर का निर्माण होने वाला है। अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस काम के लिए प्रदेश की 10 जगहों को मार्क किया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक सड़क बनाने में जहां फॉरेस्ट क्लीयरेंस का अड़ंगा रहता है, वहीं पहाड़ की मिट्टी काटने से भूस्खलन का भी खतरा हो सकता है। ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में स्थित पर्यटक स्थलों तक सैलानियों को पहुंचाने के लिए पर्यटन विभाग ने पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर रोपवे निर्माण की योजना बनाई गई है।

पर्यटन विभाग की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस योजना को धरातल पर उतराने के लिए 1400 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। कुल खर्च में से केंद्र सरकार जापान की सरकारी एजेंसी जायका के माध्यम से 80 प्रतिशत देगी, जबकि 20 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार के खजाने से दिया जाएगा।

यहां पर बनेगा प्रोजेक्ट

-पंचकोटी से बौराड़ी
-चोपता से तुंगनाथ
-भीमताल से खारकोटक
-पुरकुल गांव से हाथी पांव व मसूरी
-वन से वेदिनी बुग्याल
-गोई बरनाला से दयारा बुग्याल
-स्नो व्यू से नैना पीक
-रानीबाग से नैनीताल
-उल्का देवी से चंडिका देवी व असुरचौला मंदिर
-रोपवे सफारी इन कार्बेट लैंडस्केप