10 करोड़ डालर के ऋण अनुबंध पर हुए हस्ताक्षर

देहरादून। उत्तराखण्ड के 13 जनपदों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए उत्तराखण्ड हैल्थ सिस्टम डेवलपमेंट परियोजना के लिए विश्व बैंक द्वारा भारत सरकार और उत्तराखण्ड सरकार के साथ 10 करोड़ डालर के ऋण अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए है। यह जानकारी देते हुए अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री, ओमप्रकाश ने बताया कि परियोजना अनुबंध पर वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव राजकुमार, तत्कालीन परियोजना निदेशक डॉ.नीरज खैरवाल(वर्तमान में जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर के पद पर तैनात है) व विश्व बैंक के कार्यवाहक निदेशक हिंसाम एब्दो काहिन द्वारा हस्ताक्षर किए गए।

इस अनुबंध के बारे में जानकारी देते हुए अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री, ओमप्रकाश ने बताया कि विश्व बैंक सहायतित हैल्थ सिस्टम परियोजना के अन्तर्गत निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को वित्तीय पोषण किया जायेगा और उनके माध्यम से राज्य की जनसंख्या की स्वास्थ्य सेवाओं की मांग एवं आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए उपयोग में लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना स्वास्थ्य निदेशालय स्तर पर प्रबंधन क्षमता में विकास और सूचना तंत्र में सुधार का कार्य करेगी, तथा पर्यवेक्षण एवं शोध कार्यों पर विशेष तौर से ध्यान देगी। परियोजना के माध्यम से राज्य के नागरिकों को चिकित्सा उपचार के दौरान होने वाले व्यय एवं वित्तीय नुकसान की भरपाई सुनिश्चित कराने के लिए गुणात्मक स्वास्थ्य सेवााएं प्रदान की जायेगी।

ओमप्रकाश ने बताया कि परियोजना के अन्तर्गत निजी स्वास्थ्य संस्थाओं की सेवाएं लिये जाने की अभिनव पहल को प्रमुखता से संचालित किया जाना है, जिसके अन्तर्गत स्वास्थ्य सेवाओं की देखभाल तथा हैल्थ फाईनेन्सिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए परियोजना द्वारा धन उपलब्ध किया जायेगा।
परियोजना द्वारा जिला चिकित्सालय में निजी स्वास्थ्य संस्थाओ के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं दिये जाने के साथ ही संबंधित जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर आने वाले मरीजांे को सचल चिकित्सा वाहन के द्वारा जिला चिकित्सालय पर रैफर करते हुए उपचार दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस नेटवर्क के अन्तर्गत विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं देने के लिए आकर्षित होंगे और संबंधित जनपद तथा आबादी को स्वास्थ्य सुविधायें मिल पाएगी।
ओमप्रकाश ने बताया कि परियोजना के अन्तर्गत शिशु एवं किशोरावस्था की देखभाल तथा गैर संचारी रोगो के प्रबंधन के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध की जायेगी।

इसके अतिरिक्त परियोजना के माध्यम से निजी क्षेत्र के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की क्षमता विकास पर अधिक ध्यान दिया जायेगा, ताकि दीर्घकाल में सरकारी तंत्र इस प्रकार की योजनाओं को सफलता पूर्वक संचालित करने में सक्षम हो सकेगा और राज्य का हैल्थ सिस्टम मजबूत होगा।

वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री राजकुमार ने बताया कि यह परियोजना विशेष तौर पर राज्य में पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को दूर करेगी। तथा इसके क्रियान्वयन से विशेष तौर पर महिलाओं, बुजुर्ग तथा दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले जन समुदाय के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पडेगा। परियोजना राज्य में किसी भी प्रकार की आपदा के दौरान त्वरित उपचार की क्षमताओं को भी विकसित करेगी।

भारत में विश्व बैंक के कार्यवाहक निदेशक एवं कार्यवाहक निदेशक एवं ऑपरेशन मैनेजर हिंसाम एब्दो काहिन ने कहा कि उत्तराखण्ड के अधिकांश स्वास्थ्य सूचकांक राष्ट्रीय औसत की तुलना में बेहतर है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ एंव हिमालयी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को आसान बनाने के कारगार कदम उठाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि परियोजना द्वारा विशेष तैर पर आर्थिक रूप से कमजोर एवं असेवित जनसंख्या वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता तथा निरन्तरता बनाये रखने के कार्य को प्रमुखता से लिया जाएगा।