उद्यान विभाग की लेटलतीफी पड़ी भारी, सेबों की ब्रांडिंग को हुआ नुकसान

देहरादून। उत्तराखंड की सरकार ने जहां एक ओर उत्तराखंड के सेबों की बाजार में जगह बनाने के लिए एक मार्केंटिंग बोर्ड बनाया है उद्यान विभाग की लेटलतीफी इस बार भी सेबों पर भारी पड़ गई है जिसके चलते यहां के सेबों की ब्रांडिग नहीं हो पा रही है क्योंकि उत्तराखंड उद्यान विभाग ने सेबों की ब्रांडिंग वाली पेटियां अभी तक तैयार नहीं की है इसी वजह से उत्तराखंड का सेब हिमाचल प्रदेश की पेटियों में बेचा जा रहा है।

बता दें कि पिछले वर्ष भी उत्तराखंड एप्पल की ब्रांडिंग वाली सेब की पेटियां उद्यान विभाग तैयार नहीं करा पाया है। नतीजा ये है कि हिमाचल प्रदेश के सेब तो बाजार में आ ही रहा है लेकिन उत्तराखंड का सेब भी हिमाचल एप्पल की पेटियों में ही बेचा जा रहा है। उद्यान विभाग के निदेशक डॉक्टर बीएस नेगी इस मामले पर बात करते हुए कहा कि शीघ्र ही करीब 1 लाख पेटियां तैयार कराकर सेब किसानों तक पहुंचा दी जाएंगी।

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गौरतलब है कि सेब की पेटियों के लिए सबसे ज्यादा डिमांड उत्तरकाशी से आती है। इसके अलावा देहरादून, चमोली और नैनीताल से भी सेब किसान उत्तराखंड एप्पल की ब्रांडिंग वाली पेटियां मंगवाते हैं। सेब की पैदावार को लेकर अफसरों का कहना है कि इस बार मौसम में बदलाव के चलते उत्तराखंड में पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 40 फीसदी सेब की पैदावार कम हुई है और यही हाल सेब उत्पादक दूसरे राज्यों का भी है। यानि पिछले वर्ष राज्य में करीब सवा लाख मिट्रीक टन सेब के मुकाबले इस बार करीब 65 हजार मिट्रीक टन सेब उत्पादन का अनुमान है।

उत्तराखंड सेब को एक पहचान और लोकप्रियता दिलाने के लिए पिछले वर्ष देहरादून, दिल्ली, लखनऊ और मुम्बई में उत्तराखंड सरकार द्वारा कार्यक्रम किए गये थे और इसवर्ष भी 17और 18 सिंतबर को नेशनल एप्पल महोत्सव की तैयारी हो रही है। लेकिन सवाल ये है कि उत्तराखंड एप्पल की ब्रांड वाली पेटियां ही समय से किसानों तक नहीं नहीं पहुंचेंगी तो फिर उत्तराखंड के सेब की ब्रांडिंग कैसे होगी?