उत्तराखंड तैयार कर रहा है वेदों के नए महारथी

नई टिहरी। ओसाम के चिरन जिले में एक ऐसा बालक जो 11 साल की उम्र में नशे का आदी हो गया और पिता के गुस्से और परिवार की मजबूरियों ने उसे अंदर तक तोड़कर रख दिया। लेकिन आज वहीं बालक वेद मंत्रों का उच्चारण करता दिव्य बालक नजर आता है। साथ ही उसका आत्मबल भी लौट आया है। ऐसा संभव हो पाया टिहरी जिले के ग्राम फैगुल स्थित वेद विगनान (विज्ञान) महाविद्यापीठ के प्रयासों से। जहां पर कई प्रदेशों के बच्चों को वेद-वेदांग का निश्शुल्क ज्ञान दिया जा रहा है।

बता दें कि नई टिहरी से 25 किमी दूर फैगुल गांव आधुनिक युग में भी ऐसे ज्ञान के ऐसे महारथी तैयार कर रहा है जिसे इस युग में भी वेदों का पूरा ज्ञान हो। विद्यापीठ में छठवीं से 12वीं तक की वेद-पुराणों का अध्ययन कराया है। फिलवक्त यहां उत्तराखंड के अलावा असोम, प.बंगाल, उत्तर प्रदेश व हिमाचल प्रदेश के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं।पीतांबर को भी आठ साल की उम्र में असोम के एक शिक्षक यहां लेकर आए। इसी के साथ हुई उसके नए जीवन की शुरुआत। आज वह आसानी से वेद-पुराण के मंत्रों का उच्चारण कर लेता है। वर्तमान में विद्यापीठ में 30 बच्चे वेद-वेदांग की पढ़ाई कर रहे हैं। इसकी शुरुआत सुबह चार बजे योग-ध्यान से होती है। फिर सभी बच्चे रुद्र पूजा और वेदों का ज्ञान लेते हैं।

साथ ही विद्यापीठ का मुख्य ध्येय भारतीय दर्शन एवं संस्कृति के प्रति बच्चों को जागरूक करना है। विद्यापीठ के छात्र सुमित मिश्रा कहते हैं कि यहां पर आने के बाद जीवन में एक नया बदलाव आया है। विद्यापीठ में ही सभी छात्रों के लिए रहने-खाने की व्यवस्था की गई है। वेद विगनान महाविद्यापीठ के प्रबंधक स्वामी विश्वचैतन्य का कहना है कि धर्म-संस्कृति के संरक्षण के लिए विद्यापीठ की स्थापना की गई है। हम अपनी सनातन संस्कृति का ज्ञान दुनियाभर में अपने शिष्यों के माध्यम से फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।