बाबरी विध्वंस की बरसी आज, रामनगरी हुई संगीनों के साए में

नई दिल्ली। सायरन बजाती गाड़ियां संगीनों को थामे सुरक्षाबल ये कश्मीर घाटी या फिर बार्डर का इलाका मत समझिएगा, क्योंकि ये इलाका है मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या का। जहां पर राजनीति के साथ धर्म ने मिजाज थोड़ा ज्यादा गरम कर दिया है। यूं तो अयोध्या विवाद 165 सालों से लगातार कोर्ट के चक्कर काट रहा है। ब्रिटिश शासनकाल में कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा और आज भी फैसले की दरदार है। दरकार है रामलला को छत की दरकार है इस मजहबी रंजिश के खात्मे की लेकिन सियासत का खेल और रंग की कुछ ऐसा है, कि इस बारे में किसी को कुछ असर ही नहीं होता है।

ayodhaya
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आज राम नगरी अतिसंवेदनशील बनी है, चप्पे-चप्पे पर पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों की टुकड़ियां तैनात हैं। क्योंकि जहां हिन्दू संगठन आज विजय दिवस मना रहा है। वहीं मुस्लिम संगठनों ने मातम और बाबरी शहादत दिवस मनाने का ऐलान किया है। ये सब कुछ इस राम-रहीम की नगरी में इसलिए है, क्योंकि उसे उन्माद कहें या फिर मूर्खता जिसने रामलला के सर से छत छीनी और इस लड़ाई की आग में घी का काम कर दिया। आज के दिन यानी 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में स्थित रामजन्मभूमि पर बना विवाद ढांचा धवस्त कर दिया गया है।

इस विध्वस को आज 25 साल भी पूरे हो जाएंगे, बीते कुछ माह पहले ही इस मामले को दोषियों पर चार्ज फ्रेम भी हुआ है। लेकिन अब इसे और क्या कहेंगे कि जिस संवेदनशील में लगभग 25 साल पूरे होने के चंद माह पहले चार्ज बना हो तो दोषियों को सजा कब तक होगी ये कहा नहीं जा सकता है। लेकिन इस मामले को लेकर अब्राहम आयोग का गठन हुआ था। जिसने साल 2009 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। लेकिन वही ढाक के तीन पात ही बन गई वो रिपोर्ट ना अब वहां पर बाबरी है ना ठीक से रामलला का मंदिर, टेंट में गुजर करते हैं रामलला और इनके नाम और विवाद के सहारे राजनीति से लेकर धर्म तक की दुकानें सजाकर लोग धरती को सारे सुख उठा रहे हैं।

रामजन्मभूमि विवाद पर प्रतिदिन सुनवाई करने के मामले को लेकर बीते 5 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई थी। जिस दौरान रामलला के विपक्षी वकील और कांग्रेस के दिग्गज नेता ने कहा कि भाजपा इस मामले का राजनीतिक करण इसलिए इसकी सुनवाई 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद की जाए। आखिर इतने सालों तक सत्र न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तक चक्कर काटने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में भी सबसे संवेदनशील मामले की सुनवाई ना हो इसे रोकने और विवाद की आंच में अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए हमारे राजनेता और राजनीतिक पार्टियां किस हद तक गिर सकती हैं।

अयोध्या और वहां की आवाम कोई विवाद नहीं चाहती है। वहां की आवाम का कहना है कि जल्द से जल्द इस मुद्दे का हल निकलना चाहिए। क्योंकि इस मामले के कारण यहां का विकास और बाजार दोनों प्रभावित हो रहे हैं। अयोध्या का विकास ना हो पाने की मुख्य वजह भी यह विवाद रहा है। लेकिन आज भी इस विवाद की यादें ताजा हैं। जिनको लेकर हर साल रामनगरी में 6 दिसंबर को गमे दिवस और शौर्य दिवस मनाया जाता है।