जीएसटी के बाद गायब हुई बाजारों की रौनक, व्यापारी असमंजस में

भोपाल। गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी लागू होने के बाद बाजार की रौनक गायब हो गई है। दरअसल, इसको लेकर व्यापारी अभी भी असमंजस में है। व्यापारियों का व्यापार अब जीएसटी से बंध गया है। इसको लेकर सवाल बरकरार हैं। क्या होगा, कैसे होगा, अभी व्यापारी इसका जवाब तलाशने में जुटे हैं। जीएसटी में पंजीकरण कराने वाले व्यापारियों को महीने की 10 तारीख तक अपनी बिक्री और 17 तारीख तक खरीद का विवरण ऑनलाइन दाखिल करना होगा। साथ ही 20 तारीख तक जीएसटीएन पोर्टल पर रिटर्न दाखिल करना होगा।

बता दें कि इसके अतिरिक्त उन्हें वार्षिक रिटर्न भी दाखिल करना होगा। जबकि अभी व्यापारियों को महीने में एक बार 20 तारीख तक रिटर्न भरना पड़ता है और साल में एक बार वार्षिक रिटर्न भरना पड़ता है। समाधान योजना में जरूर त्रैमासिक रिटर्न भरना है। समाधान योजना की राशि भी 50 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपये कर दी गई है। जीएसटी में सभी ब्यौरे ऑनलाइन भरने हैं।

वहीं नए टैक्स सिस्टम से टेली और एकाउंटेंसी के जानकारों के चेहरे खिल गए हैं। 20 लाख रुपये से ज्यादा का सालाना कारोबारियों को अब कंप्यूटर पर काम करने वाले मुनीमों की जरूरत पड़ेगी क्योंकि रोजाना ही जीएसटी आधारित बिलिंग होना है, इसलिए कारोबारियों को इन विशेषज्ञों की दुकान खुलने से लेकर बंद होने तक जरूरत पड़ेगी। खाने-पीने और आवश्यक सेवाओं को जीएसटी से मुक्त रखा गया है। इसमें स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा सेवाएं, बच्चों की ड्राइंग और रंग की किताबें, फूल, झाड़ू, काजल, नमक, खजूर का गुड़, बिना मार्का प्राकृतिक शहद, खुला पनीर, लस्सी, दही, दूध, अंडे, गुड़, बिना मार्का बेसन, बिना मार्का मैदा, बिना मार्का आटा और खुले खाद्य अनाज शामिल हैं।

साथ ही चीनी, चायपत्ती, कॉफी के भुने दाने, खाद्य तेल, स्किम्ड, दूध पाउडर, शिशुओं के लिए दूध का पाउडर, पैक्ड पनीर, काजू, किसमिस, पीडीएस कैरोसिन, घरेलू कैरोसिन, घरेलू एलपीजी, जूते-चप्पल, कपड़े, अगरबत्ती, कॉयर मैट, मक्खन, घी, बादाम, फ्रूट, जूस, पैक्ड जैम, जैली छाता, पैक्ड नारियल पानी, अचार, मुरब्बा, चटनी, मोबाइल, केश तेल, टूथपेस्ट, साबुन, पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स, सूप, आइस्क्रीम, टॉयलेट्रीज, कंप्यूटर और प्रिंटर भी जीएसटी के दायरे में आएंगे और महंगे हो जाएंगे।