इस बार की दिवाली व्यापारीयों के लिए हुई फीकी: कैट

नई दिल्ली। व्यापारियों के संगठन कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जीएसटी और ई कामर्स कंपनियों के कारण देशभर के बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है। बाज़ारों में ग्राहकों की आवक कम होने से गत वर्ष के मुक़ाबले लगभग बिक्री में 40 प्रतिशत की गिरावट है।

CAIT
CAIT

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने सोमवार को एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि दिवाली में केवल तीन दिन का समय शेष रह गया है जब ख़रीदारी हर वर्ष अपनी उच्च सीमा पर होती है लेकिन इस बार देशभर के बाज़ारों में सन्नाटा छाया हुआ है और दिवाली का त्योहारी माहौल बना ही नहीं है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की जेब में नक़द की तंगी है इस कारण से बाज़ारों में मंदी का माहौल है। उपभोक्ता अधिकांश बेहद ज़रूरी सामान ही ख़रीद रहे हैं और दिवाली त्योहार की ख़रीद से बच रहे हैं। लोगों ने बड़ी मात्रा में रियल इस्टेट और सोने में निवेश कर रखा है और इन दिनो क्षेत्रों में मंदी के कारण से उनका पैसा ब्लाक हो गया है और दूसरी तरफ़ व्यापारियों ने अपना पैसा स्टॉक में निवेश कर दिया जिसके कारण उनका पैसा भी ब्लाक हो गया है।

व्यापारी नेताओं ने कहा कि ई कामर्स कम्पनियों द्वारा सरकार की नीतियों की धज्जियाँ उड़ाते हुए बड़ी मात्रा में डिस्काउंट देकर सामान बेचने का भी विपरीत प्रभाव बाज़ारों के व्यापार पर पड़ा है। ऊपर से जीएसटी से उपजे भ्रम ने बाज़ारों में अफ़रा तफ़री फैला रखी है और व्यापारी परेशान है। त्योहार से जुड़े अधिकांश सामान पर कर की दर 28 प्रतिशत होने के कारण उपभोक्ता इतनी ज़्यादा कर दर देना नहीं चाहता। बाज़ारों के माहौल को देखते हुए लगता ही नहीं की देश का इतना बड़ा त्योहार नज़दीक है और यदि यही हाल रहा तो इस बार व्यापारियों को बड़ा नुक़सान झेलना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि कंज्यूमर डयूरबल , एफ एम सी जी प्रॉडक्ट्स , इलेक्ट्रॉनिक्स , किचन सामान, लगिज , घड़ियाँ , गिफ़्ट आइटम , मिठाइयाँ , ड्राई फ़्रूट, होम डेकोर , बिजली फ़िटिंग , रेडी मेड गारमेंट, फरनीचर, डेकरेशन आइटम , फ़र्निशिंग फ़ैब्रिक, आदि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो मंदी की सीधी मार झेल रहे हैं।