जिस मंदिर के बाहर मांगती थी भीख, उसी को दान कर दिए ढाई लाख रुपये

नई दिल्ली। कौन कहता है कि भारत एक गरीब देश है। भारत में दान करने की प्रक्रिया भारत को कभी भी गरीब देश बना ही नहीं सकती। हर अमिर से लेकर गरीब और आम से लेकर खास मंदिर में अपनी इच्छा के मुताबिक दान करता है। लेकिन इसी दान प्रक्रिया को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मैसूर के वॉनटिकोप्पल के अंजनेया मंदिर के सामने वर्षो से भिख मांग रही एक भिखारन ने मंदिर में ढाई लाख रुपये का अनुदान दिया है। महिला का ये काम सुर्खिया में छाया हुआ है। बता दें कि 85 वर्षिया एमवी सीतालक्ष्मी नाम कि ये महिला पिछले एक दशक से मंदिर के बाहर भिख मांगा करती थी।

महिला ने ये राशि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं और प्रसाद प्रदान करने के लिए दान दी है। वहीं जैसे ही महिला के इस काम के बारे में मंदिर में आने वाले श्रद्धालूओं का पता चला वो सीधा सीतालक्ष्मी से मिलने गए और उन्हें इस काम के लिए बधाई दी साथ ही महिला ने उनसे मिलने आने वाले सभी लोगों को आशीर्वाद दिया। महिला के मुताबिक वो अपने भाई-भाभी के साथ रहती थी, लेकिन वो किसी के ऊपर बोझ नहीं बनना चाहती थी, इसलिए उन्होंने मंदिर के बाहर भीख मांगना शुरू कर दिया। महिला का ध्यान मंदिर प्रशासन ने पूरी तरह रखा और उन्हें किसी भी तरह कि परेशानी नहीं होने दी।

मंदिर के चेयरमैन का कहना है कि उन्होंने कभी किसी से कुछ नहीं मांगा, जिसके लिए मंदिर के एक समारोह में यहां के स्थानीय विधायक उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं। आपको बता दें कि कुछ दिनों ही गणेश महोत्सव के दौरान भी ये महिला करीब 30 हज़ार रूपये मंदिर में दान कर चुकी है। मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन को लेकर वो बैंक गईं, जहां उन्होंने 2 लाख रुपये मंदिर के नाम से दान कर दिए. कुल मिला कर ये महिला 2.5 लाख रुपये से ज़्यादा दान कर चुकी है।  सीतालक्ष्मी ने अपने दान को लेकर कहा कि लोग जो भी पैसा मुझे देते थे मैं उन्हें बैंक में जमा कर देती थी इसलिए ये पैसे मैंने उस मंदिर में दान करने का फ़ैसला लिया, जो दिन भर मेरा ख़्याल रखता था।