प्रतिबंध बढ़ाने का सीनेट का फैसला अमेरिकी अविश्वसनीयता का परिचायक : ईरान

नई दिल्ली| ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जारिफ ने शनिवार को ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को बढ़ाने के अमेरिकी सीनेट के मत की कटु आलोचना की। उन्होंने कहा है कि “यह अमेरिका की अविश्वसनीयता का एक संकेत है।” प्रेस टीवी की खबर के मुताबिक, जारिफ अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में भाग लेने नई दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सीनेट ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ प्रतिबंध के कानून ईरान सैंक्शंस एक्ट की अवधि बढ़ाने के बारे में जो मत दिया है उसका कोई शासनात्मक मूल्य नहीं है।

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अमेरिकी सीनेट ने 1990 के दशक में लागू प्रतिबंधों को बढ़ाने और अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान के साथ व्यापार करने वाले संभावित अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर प्रतिबंध लगाने के लिए अधिकृत किया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने भी नवंबर में ईरान पर प्रतिबंधों की अवधि बढ़ाने के पक्ष में मत दिया था।इस्लामिक स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी ने जारिफ के हवाले से कहा है, “यदि इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति का हस्ताक्षर हो भी जाता है तो भी इसका शासनात्मक प्रभाव से और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के दृष्टिकोण से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह अमेरिका की विश्वसनीयता के अभाव को दर्शाता है, जो अपनी वचनबद्धता के खिलाफ काम करता है।

यह कानून शुरू में इस निराधार मुद्दे पर पेश किया गया था कि ईरान असैन्य परमाणु कार्यक्रम चला रहा है। ये ताजा प्रतिबंध ईरान और अमेरिका के बीच फिर से तनाव का एक मूल कारण बन गए हैं।ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दशकों तक चले विवाद का निपटारा हुआ और दोनों देशों के बीच व पांच शक्तियों ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, जर्मनी, रूस और यूरोपीय संघ के साथ वर्ष 2015 की जुलाई में एक परमाणु समझौता हुआ। इस समझौते को संयुक्त कंप्रहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन के नाम से जाना जाता है।

प्रतिबंध बढ़ाने के इस फैसले के बारे में ह्वाइट हाउस के प्रधान उप प्रेस मंत्री एरिक शुल्ज ने शुक्रवार को कहा था कि वह उम्मीद करते हैं कि राष्ट्रपति बराक ओबामा प्रतिबंधों पर हस्ताक्षर कर देंगे।