पैनल ने दिया सुझाव, हर क्लास में इंग्लिश पढ़ना हो अनिवार्य

नई दिल्ली।  भारत के सभी सैकेंडरी स्कूलों में इंग्लिश पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। भारत की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए गठित किए गए पैनल ने पीएम मोदी को सुझाव दिए हैं कि हर ब्लॉक में एक इंग्लिश मीडियम सरकारी स्कूल बनाया जाए, ताकि बच्चों को शुरूआती स्तर पर ही अंग्रेजी भाषा का ज्ञान मिल सकें।

शुक्रवार को हुई इस बैठक में पैनल ने देश के सामाजिक विकास और शिक्षा के विकास के लिए इंग्लिश और साइंस को बढ़ावा देने के सुझाव दिए गए। जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पैनल ने 6ठीं कक्षा के बाद अंग्रेजी को अनिवार्य विषय बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ हर 5 किमी. के दायरे और हर ब्लॉक में कम से कम एक अग्रेंजी माध्यम के साथ ही साइंस विषय वाला सरकारी स्कूल बनाया जाने की बात कही गई है। पूरे देश में पैनल ने 6,612 ब्लॉक में स्कूल बनाने का सुझाव दिया है ताकि बच्चों को सही शिक्षा मिल सकें।

अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक इस पैनल ने शिक्षा में कम से कम तीन भाषाओं को शामिल करने की बात कही। इसमें हिंदी, अग्रेंजी और एक क्षेत्रीय या आधुनिक भारतीय भाषा शामिल है। बता दें कि अभी तक बस सीबीएसई के स्कूलों में शुरुआती आठ साल तक ही अग्रेंजी विषय अनिवार्य है। इसके बाद कक्षा 9 से कक्षा 12 तक अग्रेंजी अनिवार्य विषय नहीं होती। स्टूडेंट्स को हिंदी और इंग्लिश में से किसी एक विषय को ही चुनना होता है। पिछले साल अक्टूबर में आरएसएस से मान्यता प्राप्त शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने मानव संसाधन मंत्रालय को सुझाव दिया था कि देश की मातृभाषा में पढ़ाई कराई जानी चाहिए। साथ ही अग्रेंजी को किसी भी स्तर पर अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं इस पैनल ने सुझाव दिया कि शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिए अंग्रेजी जरूरी है। इसके साथ ही सभी स्कूलों में हर साल किसी तीसरी पार्टी की ओर से सर्वे भी होना चाहिए।

फेल करने की नीति पर विचार

12 सदस्यों वाले इस दल ने ये सुझाव भी दिया कि माध्यमिक विद्यालय में नजरबंदी की नीति पर भी पुर्नविचार किया जाना चाहिए। राज्यों को इस बात की आजादी मिलनी चाहिए कि किस स्तर पर नजरबंदी नीति लागू की जाए। कक्षा 8 में करियर प्लानिंग को देखते हुए एप्टीट्यूड टेस्ट और काउंसलिंग होनी चाहिए। 18 राज्य सरकार शिक्षा के अधिकार के तहत सेक्शन 16 को फॉलो करते हैं। इसके अनुसार कक्षा आठ तक स्टूडेंट को फेल नहीं किया जा सकता।

स्किल डवलपमेंट सेंटर की नई शुरूआत

बैठक में पैनल ने स्किल ट्रेनिंग पर इस पैनल ने सुझाव दिया कि सभी जिलों स्किल डवलपमेंट सेंटर खोले जाने चाहिए। ऐसे जिलों में 25 फीसदी से ज्यादा आदिवासी और निम्र जाति जनसंख्या है वहां इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इस पैनल ने स्कूल के बाद उच्च शिक्षा के लिए होने वाले एंट्रेस परीक्षाओं का स्तर सुधारने का सुझाव भी दिया। जेईई, एनईईटी, यूजीसी नेट, कैट, गैट और सीमेट जैसी परीक्षाओं का स्तर बढ़ाने की आवश्यकता है।