…पहली मुंह दिखाई हुई कामयाब, सबको पंसद आई बद्री की दुल्हनिया

नई दिल्ली। निर्देशक शशांक खेतान ने ‘हम्पटी शर्मा की दुल्हनियां’ के बाद इस बार ‘बद्रीनाथ की दुल्हनियां’ की कहानी बनाई है। इस बार भी मामला वही है। युवाओं को रिझाने के लिए प्यार के मसालों की भरमार और अंडर करंट दहेज का मामला। कोशिश इसे एक मसाला फिल्म बनाने की रही, जिसे एक बार देखा जा सकता है।

फिल्म की कहानी यूपी से है। झांसी के रहने वाले बद्रीनाथ बंसल (वरुण धवन) और राजस्थान के कोटा की रहने वाली वैदेही (आलिया भट्ट) की मुलाकात एक शादी समारोह में होती है और प्रेम कहानी में बदलती चली जाती है। प्रेम कहानी अलग-अलग रास्तों से होते हुए मुंबई और सिंगापुर तक पहुंचती है और वैसे ही इसका दी एंड होता है, जैसा हो सकता था।

निर्देशक शशांक खेतान का मकसद कुछ नयापन करने का नहीं था। उनका फोकस एक लव स्टोरी के रोमांस का था, जिस पर वे कायम रहे। इसके लिए उन्होंने जमकर उन मसालों का इस्तेमाल किया, जिनको ऐसी लव स्टोरीज में दिखाया जाता है, ताकि यूथ क्लास मजा ले सके। इसके लिए शशांक के पास मसालों की कमी नहीं थी। वरुण और आलिया की कैमिस्ट्री ने शशांक के काम को थोड़ा आसान कर दिया। उनकी कैमिस्ट्री इस फिल्म का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट बन गई। इस तरह के चुलबुले किरदारों में फिट हो जाते हैं। आलिया भी ऐसे किरदारों के लिए परफेक्ट रहती हैं। इन दोनों के लिए मुश्किल तब होती है, जब इमोशनल सीन आते हैं। वरुण तो थोड़ा संभाल लेते हैं, लेकिन आलिया कमजोर पड़ जाती हैं। फिल्म में यूपी के छोटे शहरों की सोच और माहौल को दिखाने का प्रयास हल्का रहा, क्योंकि इस कोशिश में कोई गंभीरता नहीं थी। ये कहानी मुंबई या दिल्ली या किसी और महानगर में भी होती, तो कोई फर्क नहीं पड़ता। शशांक नहीं जानते कि आज भी छोटे शहरों में प्यार या रोमांस इतना आसान नहीं है, जितना उनको मुंबई में बैठकर लगता है। इसलिए फिल्म आधे से ज्यादा वक्त फिल्मी बनावट के दायरे में ही सिमटी रहती है। लव स्टोरीज में हिट म्यूजिक की जरूरत होती है। उधार में लिया गया तम्मा तम्मा का नया वर्जन भी परदे पर बहुत नहीं जमता। बाकी गानों में फिल्म कमजोर है। तकनीकी रूप से फिल्म अच्छी है। सिनेमाटोग्राफी बेहतर है, लेकिन एडीटिंग कमजोर है। खास तौर पर दूसरे हिस्से में लंबे सीनों को कम किया जा सकता था।

शशांक और उनकी टीम ने नौजवानों के लिए फिल्म बनाई। महानगरों के नौजवानों के लिए बनी इस फिल्म में वरुण और आलिया का रोमांस उनको खुश करने वाला है। यही फिल्म की कामयाबी का सबब है। फिल्म से बहुत ज्यादा उम्मीदें, खास तौर पर अच्छी फिल्म की उम्मीदें करने वाले निराश होंगे, लेकिन मसाला फिल्में पसंद करने वालों के लिए ये वनटाइम वॉच फिल्म है।