थाईलैंड की राजकुमारी महाचक्री सिरिनधोन ने ताजमहल का किया दीदार

आगरा। दुनिया भर में ताजमहल की खूबसूरती को सुन्दरता की मिसाल माना जाता है। दूर-दूर से लोग ताज की खूबसूरती को निहारने आते हैं। प्रेम का प्रतीक इस इमारत पर देश-विदेश की बड़ी-बड़ी हस्तियां शिरकत करने आती हैं। इसी सुन्दरता को निहारने के लिए मंगलवार को थाईलैंड की राजकुमारी महाचक्री सिरिनधोन जबरदस्त सुरक्षा के बीच ताजमहल पहुंची। उनके आगमन से पूर्व ही सुरक्षा का पूरा खाका तैयार कर लिया गया था। उनके लिए ताज का आधा परिसर खाली करवा दिया गया।

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ताजमहल की खूबसूरती को राजकुमारी ने करीब डेढ़ घंटे निहारा। गाइड से उन्होंने यहां की विशेषता जानी और जिज्ञासाओं को शांत किया। थाईलैंड की राजकुमारी महाचक्री सिरिनधोर्न मंगलवार को अपने 100 सदस्यीय दल के साथ गतिमान एक्सप्रेस से आगरा कैंट स्टेशन पहुंची। यहां उनका स्वागत किया गया। इसके बाद कड़े सुरक्षा घेरे में उन्हें कार से ताजमहल ले जाया गया।

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पूरी टीम के साथ महारानी ने मोहब्बत की निशानी का दीदार किया और इसकी खूबसूरती की तारीफ की। उन्होंने ताजमहल के बारे में गाइड से जानकारी ली और अपनी टीम के साथ फोटो कराए।
थाईलैंड की महारानी की सुरक्षा के लिए तीन घेरों का सुरक्षा खाका तैयार किया गया। सुरक्षा ऐसी थी कि परिंदा भी पर न मार सके। कैंट स्टेशन पर पहुंची महारानी के साथ ट्रेन में भी सुरक्षा दल मौजूद था। यहां पर प्रोटोकॉल अधिकारी ने उन्हें रिसीव किया। इसके बाद ताजमहल ले जाया गया। उनके सुरक्षा के पहले चक्र में थाईलैंड के कमांडो थे। दूसरे सुरक्षा घेरे में सीआईएसएफ के जवान और तीसरे घेरे में यूपी पुलिस थी।

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राजकुमारी ने मोहब्बत की निशानी ताजमहल का दीदार करने के दौरान एएसआई के गाइड से इसके बारे में कई सवाल किए। राजकुमारी की जिज्ञासा बुरहानपुर से आगरा तक मुमताज की शवयात्रा थी। वह यह सुनकर दंग रह गईं कि निर्माण के लगभग एक दशक बाद शव को ताजमहल के अंदर दफनाया गया। वर्ष 1631 में मुमताज की मौत हुई और ताजमहल में वर्ष 1640 में दफनाया गया था। थाईलैंड की राजकुमारी ने कभी अकेले तो कभी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ ताजमहल की तस्वीरें खिंचवाईं।