तमिल साहित्य सेवा सम्मान से सम्मानित किए गए तरुण विजय

देहरादून। उत्तराखंड से पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय को तमिलनाडु की साहित्यिक संस्था अरिगनर पीरवई द्वारा तिरुकुरल तिलकम सम्मान दिया गया। बता दें कि तरूण विजय यह सम्मान पाने वाले पहले उत्तर भारतीय हिंदी भाषी शख्स है। तमिलनाडु के तीन सौ वर्ष पुराने सेंट पॉल विद्यालय में हुए समारोह में संस्था के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री प्रॉ वैलूसामी, सचिव डॉ. माइकेल फैराडे, प्रधानाचार्य जोसफ मोहन ने तरुण विजय को सम्मान दिया गया।

पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के बाद जब तरूणविजय को सभा को संबोधित करने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा कि वह अपने आप को थिरुकुरल (भक्त) मानते हैं और तमिल लोगों के प्यार ने उन्हें बदल दिया है। उन्होंने कहा कि वह इसे तमिल समुदाय में अपना पुनर्जन्म मानते हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय से आये एक हिंदी भाषी को सम्मानित कर तमिल समाज ने अपने हृदय की विशालता और राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रकट किया है।

तरुण विजय ने कहा, हमें दूसरे इलाकों के धरोहरों को सम्मान देना और बढ़ावा देना सीखना होगा। अगर हम दक्षिण के राज्यों की विरासत को सम्मान नहीं देते हैं तो हम एक भारत के रूप में सफल नहीं हो पाएंगे। हम लक्ष्मीबाई को तो जानते हैं, लेकिन क्या हमने, कभी न हारने वाली तमिल रानी वेलू नाचियार को जानने की कोशिश की है।

तमिल इतिहास के विख्यात महापुरुषों के बारे में जानकारी को बाकी भारत तक पहुंचाने की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि पूरा देश मीराबाई और तुलसीदास को जाने लेकिन क्या हमने कभी अंदाल, अव्वयर, कण्णगी और थिरुवल्लूवर के बारे में बाकी भारत को बताने की कोशिश की है? हमारी इतिहास की किताबों में मुगलों पर अध्याय हैं लेकिन विश्व के महानतम नौसेना सम्राट राजेंद्र चोल का जिक्र तक नहीं। तरुण विजय ने कहा कि थिरुकुरल भारत का सांस्कृतिक संविधान है और दुनिया को हमारी तरफ से दिया गया एक वरदान है।