सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार जरूरी नहीं- SC

देश में 30 जून आधी रात से जीएसटी लागू होने वाला है। ऐसे में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड का अनिवार्य बनाए जाने पर अंतिम रोक लगाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि आधार कार्ड पर सिर्फ आशंका होने का आधार पर आदेश जारी नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति नवीन सिंहा की अवकाशकालीन पीठ का कहना है कि सरकार जनता की कई समज कल्याण योजनाओं का लाभ उठाने के लिए लोगों को वंचित सिर्फ आशंका के आधार पर नहीं कर सकती है इसलिए अभी वह इस संबंध में कोई आदेश नहीं दे सकते हैं। न्यायमूर्ति ने नौ जुलाई को दिए गए जुलाई को दिए अपने उस आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि पैन कार्ड और रिटर्न फाइल करने के लिए आधार कार्ड को महत्वपूर्ण बनाता है जिसमें आयकर अधिनियम की वैधता को बरकरार रखा गया है।

पीठ ने कहा कि संबंधित मामले में 9 जून को दिए गए फैसले में पैराग्राफ 90 में की टिप्पणी को मद्देनजर रखते हुए अवलोकन की आवश्यकता नहीं है। वही इस मामले में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की पीठ का कहना है कि कई लोग सरकार की योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। उन लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है। उनके लिए केंद्र ने अंतिम सीमा को बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि अंतिम सीमा को बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दी गई है। पहले इसकी अंतिम सीमा 30 जून की थी।

शीर्ष अदालत ने इस पर तब तक आंशिक रोक लगाई थी जब तक संवैधानिक पीठ निजता के आधार पर मामले को साफ नहीं करती है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई सात निर्धारित की है। दीवान को कहा गया है कि सिर्फ आशंका को आधार बना कर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। श्याम दीवान ने कहा कि हम जिन नोटिफिकेशन पर रोक लगाना चाहते हैं वे पहले की याचिकाओं के बाद की हैं । उन्होंने कहा कि आधार एक्ट की धारा सात के तहत नोटिफिकेशन पर रोक लगाई जानी चाहिए । उन्होंने कोर्ट से मांग की कि जिसके पास आधार कार्ड नहीं है उसे किसी कल्याणकारी योजना की सुविधाओं से न रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं । सरकार को ये भी दिशानिर्देश दिए जाएं कि वो राष्ट्रव्यापी प्रचार प्रसार कर ये कहे कि आधार अनिवार्य नहीं है । आधार वैकल्पिक है इसलिए आप लोगों को डरा नहीं सकते हैं कि अगर आधार कार्ड से जोड़ा नहीं गया तो आपकी सुविधाएं खत्म कर दी जाएंगी ।
इसके पहले 17 मई को सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एल नागेश्वर राव ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था । शांता सिंह द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि कल्याणकारी​ योजनाओं के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने से रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी किए जाएं। याचिका में कहा गया है कि कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड को जोड़ने के लिए सरकार ने तीस जून की डेडलाइन तय की थी ।