देश में घुसपैठ कर रहे रोहिंग्याओं के खिलाफ सुनील भराला ने की सुप्रीम कोर्ट में याचिका

नई दिल्ली। रोहिंग्या मुस्लमानों के अवैध तौर पर भारत में घुसपैठ कर शरणार्थी बनने के प्रयास को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में राष्ट्रीय सह संयोजक भाजपा झुग्गी झोपडी प्रकोष्ठ पं. सुनील भराला ने सोमवार को एक याचिका डाली है। इनको भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गम्भीर संकट बताते हुए एक याचिका सर्वोच्च न्यायलय में डालते हुए इस विषय पर माननीय न्यायालय के आगे सारे तथ्य रखने की बात कही है । इनके अबाधित घुसपैठ पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर ख़तरा बताया है |

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भराला ने कहा कि राष्ट्र के विभिन्न संगठनों द्वारा रोहिंग्याओं की प्रताड़ना पर चिंता व्यक्त करने कि पूर्व में संयुक्त राष्ट्र द्वारा सद्दाम हुसैन के व्यापक विनाश के हथियारों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गयी, परन्तु बाद में ये कहानी ही झूठी निकली | केवल संयुक्त राष्ट्र और कुछ कथित मानवाधिकारवादी संगठनों के कहने पर नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालने की आवश्यकता है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकारवादी संगठनों पर निशाना साधते हुए श्री भराला ने कहा कि सन 2016 की रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र ने ही स्वीकार किया है कि 2012 के बाद से रोहिंग्याओं के प्रति कोई विशेष हिंसा नहीं हुई है । इस रिपोर्ट के बाद सिर्फ एक घटना इस वर्ष की बताया जा रही है, परन्तु उसमे भी पूरा विश्व एक स्वर से यह स्वीकार रहा है कि इस वर्ष की घटना म्यांमार के सैनिक ठिकानों पर रोहिंग्याओं द्वारा गंभीर हमले के बाद हुए है. स्पष्ट है कि रोहिंग्या समस्या वास्तव में एक हौवा है |

भराला ने कहा कि इस वक्त देश के सामने इस्लामी आतंकवाद एक गम्भीर मुद्दा है | देश पिछले कई दशकों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले झेल रहा है | उन्होंने कहा कि रोहिंग्या के सम्बन्ध कई आतंकवादी संगठनों से हैं यह बात कई बार सामने आ चुकी है इसलिए, इन लोगों को देश में शरण देना बहुत बड़ी भूल होगी | अतः देश की सुरक्षा और भविष्य को देखते हुए श्री भराला ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक PIL फाइल की है | इसके साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीती करने वाले विभिन्न राजनितिक दलों और NGO पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग देश हित को दांव पर लगाकर अपनी राजनीती चमकाना चाहते हैं जोकि निंदनीय है और राष्ट्र विरोधी है |