योजनाओं को कागज़ों की जगह अमली जामा पहनाए सरकार: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। किसानों की आत्महत्या के मामले पर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि योजनाओं को कागजों की बजाय अमली जामा पहनाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फसल बीमा योजना पर अमल में समस्या हो रही है क्योंकि किसानों की आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। सरकार की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक साल पहले ही शुरू हुई है| इस योजना से चालीस फीसदी किसान और तीस फीसदी फीसदी इलाका कवर हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि योजना पर अमल करना सरकार का काम है| कोर्ट केवल उसकी मानिटरिंग कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को योजना पर अमल करने के लिए छह माह का समय दिया ताकि उसका रिजल्ट पता चल सके।

बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसानों की खुदकुशी बड़ा ही गंभीर मसला है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मसले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलीसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा ने कहा है कि वो आत्महत्या रोकने के लिए उठाये जाने वाले कदमों पर विचार कर रही है लेकिन इसको राज्य सरकारें ही लागू करेंगी। इसके पहले 3 मार्च को इस मसले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि आपको एक योजना लानी चाहिए। आत्महत्या करनेवालों के परिवार को मुआवजा देना समस्या का समाधान नहीं है। अगर आप आत्महत्या करनेवाले परिवार को मुआवजा देते हैं तो आप उस समस्या से निपट नहीं रहे हैं। इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि वो सभी विभागों से बात कर इस समस्या का हल निकालेंगे।

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा था कि किसान केवल फसल उपजा सकते हैं और जिस साल उनकी उपज अच्छी होती है उसकी कीमत उन्हें कम मिलती है। इस पर आपको अध्ययन करने की जरुरत है। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार केवल वादे करती है लेकिन उस पर अमल नहीं करती है। आपको फसलों की कीमत तय करनी चाहिए। इस पर केंद्र सरकार ने कहा था कि हम इस बात की गारंटी करना चाहते हैं कि किसानों को तकलीफ न हो और उन्हें ऐसी जगह मिले जहां वे संपर्क कर सकें। केंद्र ने कहा था कि हमने किसानों की आय बढ़ाने और बीमा के लिए कई योजनाएं शुरु की हैं।