सड़क से संसद तक राजनीति इस साल हुई अमर्यादित

नई दिल्ली। भाजपा से निस्कासित नेता दयाशंकर सिंह के जुबान से स्वयंभू दलित देवी के लिए अशोभनीय टिप्पणी क्या निकली कि संसद से सड़क तक गदर मच गया।

जहाँ संसद में मायावती स्वयं दहाड़े मार मार कर अपनी इज्जत की दुहाई दे रही थीं, वही अगली सुबह उनके सिपहसालार सड़कों पर दयाशंकर सिंह की माँ बहन और बेटी की इज्जत तार तार करने में लगे थे।

माया के डर से दया हुए बाहर

दयाशंकर की बदजुबानी की सजा उनकी 25 साल की सेवा को दरकिनार कर पार्टी ने उन्हें निस्कासित करके दे दी फिर दयाशंकर ने माफी भी मांग ली। पर दलितों की देवी को तो मुद्दा मिला था अपनी शक्ति प्रदर्शन कर ताकत दिखाने का सुबह से शाम तक जमकर हंगामा हुआ ।फिर FIR और 36 घंटे में दयाशंकर को गिरफ्तार करने के वादे के साथ इस एकदिवसीय ड्रामे का अन्त हुआ।

सड़क से संसद तक हुई राजनीति अमर्यादित

लेकिन उसके बाद अगली सुबह दलित देवी के कंठ पत्रकारों के सवाल पर ऐसे सूखे कि पानी तो क्या किसी पेयपदार्थ में दम ना था कि माया को फिर दहाड़े मारने की ऊर्जा दे पाता क्योंकि बहुजन समाज पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ताओं ने पेश करो पेश करो इतना पेश किया कि अब माया को समझ नहीं आ रहा था कि फ्रंटफुट से वो 24 घंटे में बैकफुट पर कैसे आ गई ।कारण खुद बहन मायावती के शब्द बाण थे । जब संसद में गलाफाड़ फाड़ कर वो दहाड़ रही थीं कि दयाशंकर ने जो कहा अपनी माँ के लिए कहा बेटी के लिए कहा। उनके इन्हीं शब्दों का सहारा लेकर उनके चरणसेवक कभी दयाशंकर के डीएनए पर सवाल उठाते तो कभी उनके सिर पर 50 लाख का इनाम रखते। तो नारे भी लगाते पेश करो पेश करो।

खुद महिला होकर किया महिला का अपमान

क्योंकि खुद मायावती भी देश के सर्वोच्च सदन में एक महिला होकर जब दयाशंकर की माँ बहन और बेटी के ऊपर बोलने लगीं तो पूरी संसद मौन व्रतधारण किये सुनती रही।क्योंकि दलित की देवी से पंगा लेने की औकात किसी में नहीं थी। आखिर दलितों के नाम पर ये गाली की राजनीति की शुरुआत तो माया ने ही की थी जब कहा था तिलक तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार अब अगर किसी और ने इनकी शान में कोई अशोभनीय टिप्पणी की तो इनको इतना दर्द हुई की सड़क पर दूसरों की माँ बहन और बेटी इनके सिपहसालार पेश कराने उतर गये।

अजस्रपीयूष