सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज को मद्रास हाईकोर्ट से मिले नोटिस पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस केएस राधाकृष्णन के खिलाफ पेटा अवार्ड के मामले में मद्रास हाईकोर्ट के नोटिस पर स्टे लगा दिया है । मद्रास हाईकोर्ट ने जस्टिस केएस राधाकृष्णन को पेटा अवार्ड दिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें नोटिस जारी किया था । मद्रास हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ जस्टिस केएस राधाकृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की है ।


वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और शिवशंकर पणिक्कर ने चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस रमन्ना की बेंच के सामने अपनी दलीलें पेश कीं जिसके बाद कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के समक्ष सभी कार्यवाही पर स्टे लगा दिया । आपको बता दें कि हाईकोर्ट में कल ही इस मामले पर सुनवाई होनी थी ।जस्टिस केएस राधाकृष्णन ने जलीकट्टू मामले पर फैसला सुनाया था । उन्हें 2015 में पेटा अवार्ड मिला था । सलाई चक्रपाणि नामक एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर मांग की थी कि जस्टिस राधाकृष्णन को ये दिशानिर्देश दिया जाए कि पेटा के अवार्ड को लौटा दें। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जस्टिस राधाकृष्णन, राष्ट्रपति के सचिव, विधि एवं न्याय विभाग और पेटा को नोटिस जारी किया था ।

अपनी याचिका में जस्टिस राधाकृष्णन ने कहा कि हाईकोर्ट ने जजों और उनके फैसलों को संवैधानिक सुरक्षा की गारंटी देने में विफल रही है। संविधान जजों को उनके न्यायिक हैसियत के तहत किए गए कार्य को लेकर सुरक्षा प्रदान करता है। संविधान की धारा 124(4), धारा 211 के तहत जजों को सुरक्षा प्राप्त है जिसमें न्यायपालिका की स्वतंत्रता औऱ स्वायतता का उल्लेख किया गया है। उन्होंने जजेज प्रोटेक्शन एक्ट 1985 की धारा 3(1) का भी हवाला दिया है कि जजों को उनकी न्यायिक हैसियत के तहत किए गए कार्यों के खिलाफ सिविल या क्रिमिनल कार्यवाही नहीं की जा सकती है।