सपा कांग्रेस गठबंधनः प्रत्याशियों के नामों पर अब भी असमंजस की स्थिति

वाराणसी। विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस और सपा में गठबंधन तो हो गया है। वाराणसी में चुनावी बुखार की तासीर गहराती जा रही है। प्रमुख चौराहो सहित सघन बस्तियों में प्रत्याशियों के जनसम्पर्क के साथ उनके समर्थक भी अपनी जीत के समीकरण का दिलचस्प अंदाज में चर्चा कर महफिल में रंग जमाने लगे है।

एक तरफ वाराणसी के उत्तरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी रविन्द्र जायसवाल लगातार सक्रियता बनाने में जुटे हुए हैं तो दूसरी तरफ सपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता अब तक इस असमंजस में है कि आखिरकार वो चुनाव की तैयारी करें कैसे। चुनावी लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने के लिए सपा ओर कांग्रेस गठबंधन से अभी प्रत्याशी घोषित नही हुआ है। इस सीट पर सत्तारूढ़ दल सपा में छिड़े रार के बीच पहले पूर्व विधायक अब्दुल शमद अंसारी का नाम घोषित हुआ था लेकिन बाद में उनका नाम काट कार ओमप्रकाश सिंह को टिकट दे दिया गया।

ओमप्रकाश सिंह अभी चुनाव प्रचार में उतरे ही थे कि उनकी जगह फिर अब्दुल समद अंसारी का नाम चर्चा में आ गया। पहले चरण के मतदान होने में कुछ ही दिनों का समय बाकि है ऐसे में अब तक प्रत्याशी के नाम पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के मुताबिक शहर उत्तरी सीट से पूर्व विधायक अब्दुल समद अंसारी सपा उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं। बहरहाल नामांकन में चंद दिन ही बचे हुए हैं ऐसे में भी दोनों पार्टियों के बीच प्रत्याशियों के नाम पर उहापोहा की स्थिति बनी हुई है।

गौरतलब है कि इस विधानसभा में कुल 381492 मतदाता है। जिसमें पुरुष 211164, महिला 170300, अन्य 28 हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा प्रत्याशी रविन्द्र जायसवाल ने बसपा से सीट छीनी थी। रविन्द्र जायसवाल को 47980 और बसपा के सुजीत मौर्य को 45644 मत मिले थे।

जीत-हार का अन्तर मात्र 2336 वोटों का था। सपा और कांग्रेस ने मुस्लिम प्रत्याशी खड़ा कर लड़ाई को भाजपा के पक्ष में कर दिया था। कांग्रेस की राबिया कलाम 31029 तथा सपा के समद अंसारी को 37434 मत मिले। वहीं कौमी एकता दल के प्रत्याशी रविकान्त सिंह को अफजाल व मुख्तार के नाम पर 4709 मत मिले। यहां भी मुस्लिम मतों का विभाजन का लाभ भाजपा भाजपा को मिला।