बाॅलीवुड को नई दिशा देने में ”शो मैन” ने नहीं छोड़ी कोई कसर

बॉलीवुड के ‘शो मैन’ सुभाष घई आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं इनका जन्म 24 जनवरी 1945 को नागपुर में हुआ।  80 और 90 के दशक में इन्होंने मशहूर एक्टर दिलीप कुमार के साथ 3 फिल्में कीं ‘विधाता‘, ‘कर्मा’ और ‘सौदागर‘ दी। बाॅलीवुड फिल्मों को एक अलग रूप देने में सुभाष जी का गहरी योगदान है उनकी पढ़ाई दिल्पुली में हुई इसके बाद पुणें के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया से उन्होंने डिप्लोमा लिया। इसके बाद लगभग 1970 में वे हर किसी की तरह बाॅलीवुड में अपनी किस्मत आजमाने आ गए।

सुभाष घई ने कई बेहतरीन फिल्में बनाई जिसमें ‘कालीचरण’, ‘कर्ज’, ‘हीरो’, ‘कर्मा’, ‘सौदागर’, ‘राम लखन’, ‘खलनायक’, ‘परदेस’ फैंस के बीच खासी चर्चित रही। बहुत से लोगों को नहीं पता कि फल्में डायरेक्ट करने से पहले उन्होंने 1967 में फिल्म ‘आराधना’ में राजेश खन्ना के दोस्त के रूप में छोटे छोटे रोल भी किए। कभी बाॅक्स आॅफिस में हिट फिल्मों की गारंटी माने जाने वाले सुभाष घई को बाॅलीवुड का शो मैन कहा जाता था। हालांकि उनकी पिछली कई फिल्में सिनेमाघरों में वो रंग नहीं दिखा पाई है, ‘युवराज’, ‘किसना’, ‘यादें’ फ़्लॉप रहीं। फिल्म के डायरेंक्शन में कई अच्छी फिल्में दी परदेस, कर्मा, विधाता, ताल, खलनायक, सौदागर, हीरो, इकबाल आदी फिलमों ने बाॅक्स आफिस पर कमाई के सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे।

निर्देशक सुभाष जी का फिल्मों के बारे में मानना है कि भारत जैसे देश में अच्छी फिल्मों को बाॅक्स आफिस के कलेक्शन के बेस पर तय किया जाता है लेकिन अच्छी फिल्में हर युग में याद रखी जाती हैं। यहां तक की राजकपूर की मेरा नाम जोकर एक फलाॅप थी लेकिन अभिनय के नाम पर ये एक ऐतिहासिक फिल्म थी। हिंदी फिल्मों के इस शो मैन ने अपना सफर 1967 में अराधना से शुरू किया जिसके बाद एक से बढ़कर एक फिल्में देकर उन्होंने अपना नाम सबसे श्रेष्ठ निर्देशकों में की जाती है।