मैरिटल रेप की वकालत में उतरी कविता कृष्णन का ये बेशर्म सच

देश में एक बयार बही है मैरिटल रेप को लेकर कुछ नारीवादी और कथित महिलाओं के संरक्षण के ठेकेदार इसको लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की दहलीज पर नाच रहे हैं। वैसे ये नाच पहले भी हुआ है माननीय सुप्रीम कोर्ट और देश की सर्वोच्च संसद में लेकिन वहां पर कथित नारीवादियों की दाल नहीं गली। लेकिन फिर एक बार ही सही ये दुबारा आ गये हैं। इसको लेकर कथित समाजसेविका कविता कृष्णन लगातार सोशल मीडिया पर खबरें शेयर करने के साथ एक न्यूज वेबसाइड पर लाइव भी बैठी थी। जहां इन्होने इस कानून के समर्थन में गैरजिम्मेदाराना दलीलें तक दे डाली।

आईये आपको पहले ये बताते हैं कि मैरिटल रेप है क्या ,हमारे भारतीय समाज में विवाह का मूल आधार वंश वृद्धि बताया जाता है। भारतीय संस्कारों में 16 संस्कारों का जिक्र आता है। इन संस्कारों में विवाह सबसे सार्गभित संस्कार है। विवाह संस्कार एक व्यक्ति के मिलन और नई श्रृष्टि के सृजन का द्योतक माना जाता है। इसके लिए इन दोनों का मिलना और शारीरिक संबंधों का बनना आवश्यक क्रिया-कलापों में है। अगर कोई भी इन दोनों में ऐसा करने से मना करता है या नहीं करता है तो वह एक दूसरे के प्रति क्रूरता का आधार माना जाता है। साथ ही ऐसा करने वाला सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने का काम करता है। लेकिन अब वर्तमान परिवेश में विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच बनने वाले शारीरिक रिश्तों को लेकर नई जंग छिड़ी है ये जंग है वैवाहिक बलात्कार को संज्ञेय अपराध के तौर पर कानून की परिधि में लाने की यानी शादी के बाद पति-पत्नी के बीच बनने वाले शारीरिक संबंध अगर पत्नी की इच्छा के बिना बनाए गए तो उसे बलात्कार कहा जाये और इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान रखा जाये जैसा कि आईपीसी की धारा 375 और 376 में वर्णित है।

इसको लेकर लेकर कई बार सुप्रीम कोर्ट से संसद तक विश्व परिक्रमा कर चुके कथित महिलाओं के कर्णधार एक बार फिर मैदान में हैं। निर्भया के साथ साल 2012 में हुए हादसे के बाद इसको लेकर मांग काफी तेज हो गई। संसद में इसको लेकर काफी बहस चली आखिरकार संसद को मानना पड़ा कि इस देश में बलात्कार सबसे घृणित काम है। लेकिन पति-पत्नी और उनके बीच होने वाला शारीरिक संबंध या बनाए जाने वाला शारीरिक संबंध इससे परे है। उसे वैवाहिक बलात्कार की श्रेणी में रख कर अपराध नहीं माना जा सकता है। वरना वैवाहिक रिश्ता ही खत्म ही नहीं बल्कि इसका कोई वजूद नहीं रहेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में तल्ख टिप्पणी देते हुए साफ किया कि जबरन वैवाहिक यौनसंबंध बलात्कार में शामिल किया जाये या नहीं इस पर काफी बहस पहले हो चुकी है। इसको भारतीय परिवेश में आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता है।अदालत ने साफ कहा कि इस पर संसद में काफी बहस हो चुकी है। इसे आपराधिक कृत्य की श्रेणी में लाने से विवाह की संस्था पर असर पड़ सकता है। इसे किसी भी हाल में आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता है। इसके साथ ही इसके लागू करने और कानून बनाने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं को खारिज किया गया।

लेकिन कथित नारीवादी और महिला उत्थान का बीड़ा उठाने वाले फिर सक्रिय हो गए। दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका डाल दी है । जिसमें मांग की गई है कि इसे अपराध घोषित करते हुए इसको कानून की परिधि में लाया जाये जिससे विवाहित महिला के मानवाधिकार की रक्षा हो सके। इस सन्दर्भ में कोर्ट में कथित एख पीड़िता को भी खड़ा किया गया है। कथित पीड़ित याचिकाकार्ता के वकील की हैसियत से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विलस ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि शादी का मतलब ये नहीं है कि पति अपनी पत्नी के साथ उसकी मर्जी के बिना शारीरिक संबंध बनाए। विवाह को किसी लाइसेंस की तरह नहीं देखा जाना चाहिए कि पति अपनी पत्नी के साथ उसकी मर्जी के बिना बलात्कार करता रहे। उन्होने अफी दलील में कहा कि जैसे एक अविवाहित महिला को अपने शरीर का अधिकार प्राप्त होता है। उसी तरह एक विवाहिता को भी दिया जाना चाहिए, इस लाइसेंस की आड़ में कोई उसकी मर्जी के खिलाफ कुछ ना कर सके। इसके साथ ही उन्होने कहा कि शादी का मतलब ये नहीं होता है कि औरतों को दास बना दिया जाए।

उन्होने अपनी दलील में कहा कि नेपाल जैसे देश ने भी साल 2001 में साफ करते हुए इस विषय पर वहां के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर कोई पुरूष अपनी विवाहित पत्नी की मर्जी के खिलाफ उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो वह उसकी स्वतंत्रता का हनन करता है। इसके साथ ही याचिकाकार्ता ने दलील देते हुए कहा कि कई यूरोपियन देशों मैरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में डाला गया है। फिलिपींस जैसा देश भी शादी के बाद जबरन शारीरिक संबंध बनाने को अपराध मानता है। तो भारत में इसे क्यूं नहीं लागू किया जा रहा है।

मैरिटल रेप इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है । आने वाले 4 सितबंर को दिल्ली हाईकोर्ट में इसको लेकर फाइनल बहस होनी है। लेकिन इसके पहले कविता कृष्णन इसको लेकर मैदान में कमर कस चुकी हैं। उसका एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें वो इसको लेकर बड़ी वकालत कर रही हैं। ये वही कविता कृष्णन है जिन्होने चंद माह पहले अपने फेसबुक एकाउंट से एक विवादित पोस्ट करते हुए कहा था कि अफसोस की बात है कि कुछ लोग फ्री सेक्स से डरते हैं इसके साथ ही अनफ्री सेक्स को लेकर कहा था कि ये कुछ और नहीं बल्कि रेप है।

इसी पोस्ट पर जब विवादित कमेंट आने लगे तो उनकी मां ने भी उनके समर्थन में एक यूजर को जवाब देते हुए कहा कि कविता की बात का समर्थन करते हुए कहा कि मैने फ्री सेक्स किया है। अपनी पोस्ट में कहा कि मैं समर्थन करती हूं फ्री सेक्स का जो कि मैने किया है आगे भी हो जब आपकी मर्जी हो और जिसके साथ आप चाहते हों ये मैं हर स्त्री पुरूष के लिए चाहती हूं और इसके लिए उनके साथ खड़ी हूं। इसी बात को उनकी पुत्री ने भी कहा था फिर एक बार देश में सेक्स फ्री को लेकर बहस छिड़ गई थी।

आज यही कविता कृष्णन खड़ी है मैरिटल रेप को लेकर यानी वैवाहिक बलात्कार पति पत्नी के बीच होने वाले शारीरिक संबंध को वैवाहिक बलात्कार माना जाये और इसके तहत पति को बलात्कारी मान कर सजा दी जाए। आखिर इस देश में ये कौन की हवा बहाने की कोशिश के इन कथित महिलावादियों की जिसका अंत केवल विनाश ही है।

अजस्र पीयूष