‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ पर सेंसर बोर्ड चला सकता है कैंची

नई दिल्ली। लगता है जैसा कि इन दिनों बॉलीवुड में विवादित फिल्में बनने का ट्रेंड सा हो गया है। जो फिल्में पहले सिनेमाघरों में दिखाई जानी चाहिए उससे पहले ही वो फिल्म सेंसर बोर्ड और कोर्ट की निगाहों में खटकने लगती है। पहले कंगनी की अक्षय की’ LLB’ और कंगना की ‘रंगून’ पर कोर्ट ने कैंची चलाई और अब सेंसर बोर्ड ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ पर कैंची चलाने के मूड में लग रहा है।

इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने हरी झंडी दिखाने से साफ इंकार कर दिया है। बोर्ड ने फिल्म की कहानी को नारीवादी और जिंदगी से ज्यादा फैंटेसी पर आधारित होने का कारण देते हुए इसको सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया है। बोर्ड ने कहा की फिल्म में बहुत से अडलट सीन और अभद्र भाषा का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया गया है साथ ही फिल्म में ऑडियो पोर्नोग्राफी भी शामिल है। इस वजह से फिल्म को 1(ए),2(vii), 2(ix), 2(x), 2(xi), 2(xii) और 3(i) गाइडलाइन के तहत सर्टिफिकेट देने के काबिल नहीं माना जाता।

आपको बता दें की इस फिल्म को प्रकाश झा ने प्रोड्यूस किया है और इसका निर्देशन अलंकृता ने किया है। फिल्म में कोंकणा सेन शर्मा, रत्न पाठक शाह, आहना कुमार और प्लाबिता बोरठाकुर मुख्य भूमिकाओं में है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक श्रीवास्त ने कहा की बोर्ड इस फिल्म को सर्टिफिकेट इसलिए नहीं दे रही क्योंकि इसमें महिलाओं की आवाज को मजबूती के साथ रखा गया है और यह पित्तृ सत्तात्मकता समाज को चुनौती देती है।

वहीं, फिल्म के निर्माता प्रकाश ने कहा की हमारे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है,लेकिन फिर भी सीबीएफसी ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया है। हालांकि, फिल्म के निर्माता और निर्देशक ने अभी तक हार नहीं मानी और अब निर्माता रिवाइजिंग कमिटी के आधिकारिक पत्र का इंतयार कर रहे है। इसके बाद वो फिल्म को सर्टिफिकेट दिलाने के लिए एपीलेट ट्रिब्युनल को पहल करेंगे जिससे फिल्म की रिलीज संभव हो सके।

आपको बता दें की भले इस फिल्म को सेंसर बोर्ड से मंजूरी नहीं मिल पा रही लेकिन इसे मुंबई फिल्म फेस्टिवल में काफी सरहाना मिली थी। इस फिल्म को मामी फिल्म फेस्टिवल में लिंग समानता पर बनी सर्वश्रेष्ठ ऑक्सफेम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा टोक्यो फिल्म फेस्टिवल में भी इसने स्पिरिट ऑफ एशिया का खिताब अपने नाम कर चुकी है।