ऐसा रहा ‘प्रणव दा’ का राजनीतिक सफर

नई दिल्ली। आज भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का जन्मदिन है। भारतीय राजनीति में उनके अभिन्न योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। वे 2012 में भारत के तेरहवें राष्ट्रपति चुने गए। प्रणव मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के किरनाहर शहर में 11 दिसम्बर 1935 को पास हुआ था। वो एक बाह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनके पिता कामदा मुखर्जी और माता राजलक्ष्मी हैं। प्रणव मुखर्जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। उनके पिता भी कांग्रेस के एक सक्रिय नेता थे,  जो पश्चिम बंगाल विधान परिषद में 1952 से 64 तक सदस्य रहे थे। प्रणव मुखर्जी नेअपनी पढ़ाई सूरी विद्यासागर से पूरी की है।

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– प्रणव मुखर्जी सन 1991 से 1996 तक भारत के चुनाव आयोग के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

– वो सोनिया गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री मनमोहन सिंह के विशेष परार्मशदाताओं में से एक होने के कारण 2004 में जब कांग्रेस सत्ता में आई तो वो स्वतंत्र भारत के रक्षामंत्री बने।

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– उन्हें सन 2007 में भारत के सर्वाधिक सम्मानजनक पुरस्कार पद्म विभूषण से भी नवाजा जा चुका है।

– वित्त मंत्रालय और अन्य आर्थिक मंत्रालयों में उनका अभिन्न योगदान है, देश की आर्थिक नीति के निर्धारण में  मुखर्जी प्रमुख लोगों में से एक हैं। वो भारत के अब तक के सबसे महान और विख्यात राष्ट्रपति में से एक हैं।

-इसके अलावा उन्होंने 1980 से 1985 में प्रधानमंत्री के उपस्थित न होने के कारण केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल की बैठकों की अध्यक्षता भी की थी।

– शुरूआती दौर में उन्होंने काफी समय तक शिक्षक के रूप में भी काम किया। वे पेशे से वकील भी रह चुके हैं।

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-प्रणब ने अपना करियर कोलकाता में डिप्टी अकाउंटेंट जनरल के कार्यालय में क्लर्क के रूप में शुरू किया। प्रणब ने करियर की शुरूआत कोलकाता में डिप्टी अकाउंटेंट जनरल के कार्यालय में क्लर्क के तौर पर शुरू किया था।

– पार्टी के बड़े नेता होने के नाते उन्हें राजनीति और और आर्थिक नीतियों का काफी अनुभव है।

 

-प्रणब मुखर्जी वर्ष 1974 में भारत के वित्त राज्य मंत्री बने। अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्हें यूरोमनी मैगजीन ने विश्व के सबसे चर्चित वित्त मंत्री के रूप में चुना।1975 में वे भारत के राजस्व एवं बैंकिंग विभाग के मंत्री पद पर आसीन हुए।

–  उनका विवाह बाइस साल की आयु में शुभ्रा मुखर्जी के साथ हुआ , जिनसे उनके दो बेटे और एक बेटी है। प्रणव दा संगीत सुनने और किताबें पढ़ने का शौक रखते हैं।

– उन्होंने 2009 में सरकार का वार्षिक बजट पेश किया जिसमें उन्होंने फ्रिंज बेनिफिट टैक्स और कमोडिटीज ट्रांसक्शन टैक्स को खत्म कर देने के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर कई फैसले लिए।