नौसेना के खेमे में शामिल हुई ‘तारिणी’…जानिए क्यों है ये नौका खास?

मुंबई। समुद्र में चलने वाली सेलबोट आईएनएसवी तरिणी को शनिवार शाम गोवा में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा की उपस्थिति में इसे नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। यह नौका भारतीय महिलाओं के सबसे पहले दल को दुनिया की सैर पर लेकर जाएगी जिसे भारतीय नौसेना द्वारा अगस्त में शुरू किया जाएगा। इस अवसर पर एडमिरल सुनील लांबा ने घोषणा की कि उसके सभी महिलाओं क्रू का बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान अगस्त 2017 में शुरू किए जाने की उम्मीद है।

महिलाओं के चालक दल के बारे में मीडिया से बात करते हुए कहा कि टीम आईएनएसवी महादेई पर 10,000 से अधिक नौटिकल मील की यात्रा कर चुकी है। मानसून के समुद्र और तेज हवा में बड़ी बहादुरी से भारत से मॉरीशस और वापस गोवा से केप टाउन की यात्रा कर चुका है। लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में 6 महिला अधिकारियों के दल का चयन किया गया है। इन्होंने आईएनडब्ल्यूटीसी मुंबई में नौवहन का मौलिक प्रशिक्षण लिया है। इस नौका ने इसी साल 30 जनवरी को ट्रायल पूरा किया है। पिछले साल मार्च में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इसका आगाज किया था।

जानिए क्या है तारिणी की खासियत?

-महादेई के बाद ‘तारिणी’ नौसेना का दूसरा नौकायन पोत है।

-इसका संस्कृत में अर्थ है तारने वाला।

-ओडिशा के गंजाम जिले के प्रसिद्ध तारा तारिणी मंदिर से प्रेरित डिजाइन की इस नौका का नाम तारिणी रखा गया है।

-इस बोट में मुश्किल से मुश्किल हालात में भी सफर तय करने की ताकत है।

-सेटेलाइट सिस्टम के जरिये तारिणी क्रू से दुनिया के किसी भी हिस्से में संपर्क किया जा सकता है।

-आईएनएसीवी तारिणी का निर्माण गोवा की मैसर्स एक्वेरियस शिपयार्ड प्राइवेट लिमिटेड, दिवर ने किया है।

-एल्युमीनियम और स्टील के ढांचे की तुलना में बेहतर प्रदर्शन के लिए इस नौका का ढांचा लकड़ी और फाइबर ग्लास से बनाया गया है।