नालों की सफाई के नाम पर हुए घोटाले की जांच की मांग

नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर नालों की सफाई के नाम पर हर साल होने वाले कथित घोटालों की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा जांच कराने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में मानसून पूर्व हुई बरसातों में आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा नालों को साफ-सफाई करने के दावों की पोल खोल दी है। दिल्ली का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं था, जहां जल भराव की समस्या न रही हो।

बता दें कि उन्होंने कहा कि दिल्ली 2001 के मास्टर प्लान में ड्रेनेज का मास्टर प्लान बनाने की सिफारिश की गई थी जिसकी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की थी। लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारी को निभाने में विफल रही है और अभी तक इस पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है। दिल्ली को जल भराव से बचाने के उपायों को लेकर, दिल्ली सरकार को एक से अधिक बार लिख चुके हैं। लेकिन मुख्यमंत्री इस मामले का केवल राजनीतिकरण करके अपनी जिम्मेदारी अन्य सरकारी संस्थानों पर डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

साथ ही गुप्ता ने उपराज्यपाल अनिल बैजल को पत्र लिखकर कहा कि दिल्ली में जल भराव का मुख्य कारण लोक निर्माण विभाग दिल्ली द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र के नालों तथा दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवर की कॉस्मेटिक सफाई करना है। दिल्ली में नजफगढ़ ड्रेन, कुशक नाला और बारामूला नाला जैसे कई बड़े नालों में ऊपर तक गाद भर गई है और बरसात का सारा पानी नालों के माध्यम से मुख्य नालों में डिस्चार्ज होने के स्थान पर सड़कों पर फैल जाता है। जो कि वहां रासायनिक कारणों से छोटे-बड़े गड्ढे पैदा कर देता है। इन गड्ढों में पानी भरने के साथ ही पैदल यात्रियों और ट्रैफिक जाम की परेशानी को केवल भुक्तभोगी ही जानते हैं, दिल्ली सचिवालय में बैठकर इसका अनुभव नहीं हो सकता।

वहीं उन्होंने कहा कि दिल्ली में नालों की सफाई के नाम पर हर साल बहुत बड़ा घोटाला होता है, जिसे कि अज्ञात कारणों से उच्च स्तर पर दबा दिया जाता है। गुप्ता ने उपराज्यपाल से कहा कि पिछले तीन वर्षों में नालों की सफाई पर विभागीय और ठेकेदारों के माध्यम से किया गया खर्च, नालों से निकाली गयी गाद की मात्रा, इसे नालों से निकालकर कहां डाला गया, इस काम के लिए कितने ट्रक आदि लगाए गए और कितना विभागीय स्टाफ लगाया गया कि पूरी जांच एंटी करप्शन ब्यूरो के माध्यम से करायी जाए। जिससे कि भविष्य में नालों की सफाई के माध्यम से होने वाले वार्षिक भ्रष्टाचार पर रोक लग सके और नालों की सफाई ठीक प्रकार से होकर दिल्ली की जनता को जल भराव की समस्या से मुक्ति मिल सके।