सोमवार से शुरू हो रहा सावन, 50 साल बाद बन रहा विशेष संयोग

नई दिल्ली। इस बार सावन की शुरुआत सोमवार को हो रही है। 50 साल बाद यह संयोग बना है कि सावन माह की शुरुआत और समापन दोनों सोमवार को होगा। इस बार सावन में पांच सोमवारी व्रत पड़ेंगे। सावन भगवान भोलेनाथ की भक्ति का महीना होता है। 10 जुलाई से शुरू हो रहे सावन को लेकर रांची सहित पूरे झारखंड में भक्ति की बयार बहेगी।

ज्योतिषयों के अनुसार खास योग कई वर्षों के बाद बनने से इस सावन में सोमवार को उपवास रखने से शिव की विशेष कृपा मिलेगी। बारिश की बूंदों के बीच सावन का पवित्र महीना 10 जुलाई से शुरू हो जायेगा।

सावन शुरू होते ही शिवभक्त भगवान शिव की आराधना में लग जायेंगे। श्रावण मास को लेकर मंदिरों और घरों में पूजा की तैयारी पूरी हो गई है। लोगों ने घर की साफ-सफाई कर ली है। गुरु पूर्णिमा से ही घरों में शुद्ध और शाकाहारी भोजन बनना शुरू हो गया है।
सावन को लेकर गेरुए वस्त्रों की खरीदारी शुरू हो गई है। कई लोगों ने इस रंग का कुर्ता सिलवाया है। महिलाओं के लिए गेरुए रंग की साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट बाजार में उपलब्ध है। इस रंग के सलवार कुर्ता भी दुपट्टे के साथ बाजार में उपलब्ध है। सावन को लेकर मंदिरों को भी आकर्षक तरीके से सजाया गया है। खूंटी स्थित आम्रेश्वरधाम और पहाड़ी मंदिर स्थित भगवान शिव के मंदिर को भी सजाया गया है। इसके अलावा शहर के अन्य शिव मंदिरों को भी सजाया गया है।
इस वर्ष सावन में 10 जुलाई को पहली सोमवारी होगी। दूसरी सोमवारी 17 जुलाई को और तीसरी सोमवारी 24 जुलाई को होगी। चौथी सोमवारी 24 जुलाई को होगी और अंतिम पांचवीं सोमवारी सात अगस्त को होगी। हर सोमवार को उपवास रखकर शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, बेल पत्र से पूजा करने से भगवान का आशीर्वाद मिलेगा। प्रसाद के रूप में इलायची, बताशा, पेड़ा, केला, सेब, नाशपति, अमरूद आदि फल चढ़ाया जा सकता है। इस महीने में दान ध्यान का भी महत्व होता है।
पंडित रामदेव पांडेय ने बताया कि इस बार शुभ योग और संयोग से सावन सजेगा। इसी दिन से 16 सोमवारी के व्रत की शुरुआत कर सकते हैं।

सोमवार से शुरू हो रहे सावन में कई विशेष योग बन रहे हैं। पहले सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग मिल रहा है, जो बहुत शुभ है। इस दिन जप-तप का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि 10 जुलाई को दिन के 10:21 बजे तक ही प्रतिपदा है। 24 जुलाई को पुष्य नक्षत्र और सात अगस्त को रक्षाबंधन है। इस दिन चंद्रग्रहण भी है।
पांच जुलाई से ही श्रद्धालुओं का हुजूम सुलतानगंज से गंगाजल लेकर बाबाधाम के लिए निकलना शुरू हो गया है। सावन के महीने में महिलाएं विशेष शृंगार करती हैं। सुहाग की निशानी चूड़ी, बिंदी, पायल, बिछिया, चेन आदि अलंकार वे पूरे महीना धारण करती हैं। हरे रंग की श्रृंगार सामग्री के साथ इसी रंग की साड़ी पहनती है। साथ ही मेहंदी लगाने की परंपरा है। हाथों में एलबो तक और पैरों में घुटनों तक महिलाएं मेहंदी की खूबसूरत कलाकारी करती हैं।