नये साल में नये अंदाज के साथ शुरू हुई समाजवादी महाभारत

लखनऊ। समाजवादी परिवार की जंग एक नये मोड़ पर आ गई है। परिवार में मचा बीते साल का कोहराम साल की शुरूआत में भी जारी रहा है। बीते साल समाजवादी पार्टी में जिस दंगल का आगाज हुआ था । इसकी शुरूआत पार्टी में कौमी एकता दल के विलय से शुरू हुई थी। जिसका लगातार अखिलेश विरोध कर रहे थे।

कौमी एकता दल के विलय से खिंची तलवार
लेकिन शिवपाल ने आगे बढ़कर कौमी एकता दल का विलय करा दिया । जिसके बाद परिवार में कार्रवाई की तलवारें निकल पड़ीं । भतीजे ने चाचा के और सहयोगियों के पर कतर दिये। फिर परिवार ने आपस में बैठ कर सुलह और समझौते का मसौदा तैयार किया । इस दौर में कईयों पर गाज गिरा दी। चाचा शिवपाल का विभाग छींन लिया। अखिलेश का नाराजगी का पारा इस कदर चढा कि सपा सुप्रीमों को आनन-फानन में संसदीय दल की मीटिंग बुलाकर पार्टी का विलय रद्द करना पड़ा।

दंगल पार्ट-1
अखिलेश की इस कार्रवाई में गायत्री समेत कई बड़े चेहरों की रंगत उड़ गई थी। लेकिन परिवार में खिंची सियासत की तलवार आखिरकार बातचीत के बाद म्यान में चली गई। लेकिन दिलों में आई टीस बाकी थी। फिर अक्टूबर में एकाएक पार्टी में फिर शुरू हुआ दंगलों का दौर ये दौर। बार बार बाहरी आदमी के तौर पर कहे जाने वाले अमर सिंह की पहले तो मुलायम ने पार्टी का महासचिव बना दिया। फिर अपने ही बेटे के सिर से प्रदेश अध्यक्ष का ताज छींन लिया गया।

चला कार्रवाईयों का दौर
फिर शुरू हुआ समाजवादी परिवार में कार्रवाईयों इस्तीफे और निस्कासन का दौर। कभी शिवपाल कार्रवाई की तलवार चलाते तो कभी सपा सुप्रीमों आखिरकार अखिलेश ने सबको दरकिनार करते हुए, कार्रवाईयों की झड़ी लगा दी। फिर तो चाचा शिवपाल से उनका मंत्रालय और मंत्री पद तक लेकर अपनी ताकत का अहसास करा दिया। इसके बाद फिर मीटिंगों का दौर सपा सपा में शुरू हुआ। जिसके बाद एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पार्टी के थिंक टैंक रामगोपाल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

सियासी ड्रामेबाजी का दिखा रोचक नजारा
इसके बाद समाजवादी कुनबे में बिखराव का दौर बड़े पैमाने पर था। अटकलें लगाई जाने लगी थीं, कि अखिलेश अलग पार्टी बना सकते हैं। फिर मीटिंगों के दौर में अखिलेश और शिवपाल समर्थकों की झड़पें और पोस्टर वार सूबे की राजधानी से लेकर हर जिलों में दिखने लगे । पार्टी ने प्रेस कर समाजवादी परिवार के विवाद पर पटाक्षेप करने की कोशिश की लेकिन मंच पर हुए सियासी ड्रामें ने चाचा और भतीजे की दूरियां लोगों तक साफ पहुंचा दी।

सुलह के मसौदे के बाद एक हुआ परिवार
फिर बिचौलियों ने समझौते की कोशिशे की बातचीत का दौर चला अखिलेश की रथयात्रा से सुलह का दौर सामने आया। पार्टी की स्थापना दिवस पर सारा समाजवादी कुनबा साथ में एक मंच पर खड़ा था। लग रहा था कि बीते दिनों चले और मचे घमासान का युग अब खत्म है। बाद में कार्रवाईयों की जद में आये लोगों की पार्टी में वापसी होने लगी। पार्टी चुनाव में नई ताकत के साथ जाने को तैयार थी। लेकिन दंगल पार्ट -2 का आगाज होना अभी बाकी था। सूबे की सियासत में चाचा-भतीजे के इस रोचक मुकाबले की सुगबुगाहट चलती रही कभी पोस्टरों के जरिये तो कभी रैलियों में बिखराव के जरिये।

दंगल पार्ट-2
लेकिन अब जैसे जैसे इस साल की अंतिम बेला करीबी आती जा रही थी। उसकी के साथ समाजवादी परिवार में दंगल को लेकर तैयारियां तेज हो गई थीं। शिवपाल ने अपने उम्मीदवारों की सूची सपा सुप्रीमों को सौंप इस दंगल में मुलायम को लेकर उतरने का मन बनाया। मुलायम ने सूची जारी करते हुए अखिलेश के करीबियों के ही टिकट काट दिये। लेकिन इसके बाद फिर सूचियों के दौर शुरू हो गये। कभी मुलायम की सूची तो कभी शिवपाल की सूची तो फिर अखिलेश की सूची, सूबे की 403 सीटों के लिए समाजवादी पार्टी के दंगल पार्ट-2 में तकरीबन 574 उम्मीदवार बन गये। अब ये दंगल किस करवट बैठेगा। लेकिन ये साफ हो गया। समाजवाद से परिवारवाद की राजनीति अब सियासी दंगल में उलझ गई है।

मुलायम ने दी बेटे को पटकनी
लेकिन कुश्ती से राजनीति का सफर तय करने वाले मुलायम सिंह ने इस सियासी दंगल में शिवपाल के सहारे पहले तो सीएम अखिलेश को नोटिस भेजते हुए कारण बताने को कहा फिर आधे घंटे बाद पार्टी कार्यालय में जाकर प्रेस कॉफ्रेंस कर पहले रामगोपाल को पार्टी से गलत बयानबाजी करने पर बाहर करने की बात कही इसके बाद सबसे बड़ा ऐलान करते हुए अखिलेश को भी पार्टी से बाहर कर दिया जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया। इसके बाद लगातार मीटिंगों का दौर अखिलेश और मुलायम दोनों कैम्पों में विचार विमर्श का दौर शुरू हो गया है।

फिर हुआ पिता-पु्त्र का मिलाप
फिर सुबह होते होते पूरे प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरम था। सुलह की और समझौते की कोशिशें होने लगी। वार्ताओं का दौर चला करीबियों ने दोनों पक्षों को एक साथ एक मंच पर लाने की कवायद तेज की आखिरकार समझौते की नींव रख उठी। अखिलेश और रामगोपाल की वापसी फिर हो गई। इसी के साथ इस समाजवादी दंगल का अंत साल के अंत में हो ही गया। लेकिन ये अंत नहीं था । अंत तो बस इस साल 2016 का था। नया सबेरा नये दंगल का आगाज लेकर आया था।

नये साल में फिर नये दंगल का आगाज़
समाजवादी परिवार में बीते साल से चल रहा संग्राम अब नये मोड़ आ गया है। आज रामगोपाल और अखिलेश के द्वारा आयोजित अधिवेशन में अखिलेश की राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी के बाद कुछ अहम प्रस्ताव लाये गये। अधिवेशन में मौजूद पार्टी के सदस्यों और पदाधिकारियों के बीच अखिलेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर स्वयं ताजपोशी कर दी गई।इस अधिवेशन में अखिलेश के सर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर अब विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। अधिवेसन में शिवपाल को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाते हुए । अमर सिंह पर अखिलेश की कार्रवाई की तलवार चली है। स्वयंभू राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अमर सिंह को पार्टी से चलता कर दिया है।

दोनों खेमों में चला रहा है चर्चा का दौर
अब दोनों खेमे एक दूसरे पर सही और गलत का आरोप लगाने में लग गये हैं। मुलायम और शिवपाल की ओर से लगातार इस पूरे प्रकरण को असंवैधानिक करार देते हुए कार्रवाई की जा रही है। तो वहीं अखिलेश का खेमा अधिवेशन में पारित प्रस्तावों को चुनाव आयोग ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसी के साथ ही अखिलेश ने नया प्रदेश अध्यक्ष भी मनोनीत कर दिया है। पार्टी दफ्तर पर अराजकता का माहौल है। अखिलेश समर्थकों ने पार्टी दफ्तर अपने कब्जे में ले रखा है। शिवपाल और मुलायम लगातार सुबह से कई दौर की मंत्रणा कर चुके हैं।

अजस्रपीयूष