रुद्रप्रयागः ऐसा स्थान जहां के दर्शन से मिल सकती है मुक्ति

देहरादून। उत्तराखंड में रुद्रपयाग जिले में एक शहर और नगर पंचायत है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का संगमस्थल हैं। रुद्रप्रयाग की सबसे खास बात ये है कि यहां से अलकनंदा देवप्रयाग में जाकर भागीरथी से मिलती है तथा गंगा नदी का निर्माण करती है।

नदियों के दर्शन यहां के दृश्य को मनोरम बनाते हैं।समुद्र तल से 3581 मीटर की ऊंचाई पर केदारनाथ देश में भगवान श‍िव शंकर के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। चार धामों में से एक केदारनाथ में श्रद्धालु भगवान भोले भंडारी के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।

 

समु्द्र तल से करीब 1829 मीटर की ऊंचाई पर सोनप्रयाग बासुकी और मंदाकिनी नदी के तट पर बसा है। यह मुख्य केदारनाथ रूट पर स्थ‍ित है। सोनप्रयाग एक पवित्र स्थान है और इसका धार्मिक महत्व भी खूब है। इस जगह पर जाने की मान्यता ये है कि ऐसा माना जाता है कि सोनप्रयाग में मंदाकिनी के पवित्र जल के स्पर्श मात्र से ही व्यक्ति को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।

केदारनाथ यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री यहां विश्राम करते हैं। यहां पर गर्म पानी के तालाब में स्नान करके श्रद्धालु गौरी देवी के मंदिर में दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। ये सोनप्रयाग से 5 किमी दूर है। यहां से केदारनात तक पैदल चलना पड़ता है।

यहां पर मंदिर और नदी भर के दर्शन ही नहीं है। अगर आप को रोमांचक चीजें करना पसंद है तो इस लिहाज से भी ये जगह आपके लिए बहुत खास है।अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं तो मदमहेश्वर से करीब 6 किमी दूर कंचनी ताल भी जा सकते हैं। यहां तक जाना किसी जबरदस्त एडवेंचर से कम नहीं है।