रिश्वतखोरी के चक्कर में भटकने को मजबूर है सेवानिवृत्त कर्मचारी

फतेहपुर। केन्द्र की मोदी सरकार ने भले ही भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त कर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का ऐलान किया हो, लेकिन केन्द्र के अधीन संचालित जिले के डाक विभाग के जिम्मेदारों पर इसका कोई प्रभाव नहीं है। यही कारण है कि बीते आठ माह पहले सेवा निवृत्त हुये कर्मचारी को आज तक एक फूटी कौड़ी नसीब नहीं हो सकी है। आला अधिकारी के भ्रष्ट रवैये से आजिज सेवा मुक्त हुए कर्मचारी ने आज प्रधान डाक घर में परिवार समेत धरना देते हुये अपने भुगतान की गुहार लगाई।

मामला खागा तहसील के कोट गांव में संचालित उपडाक घर के डाक पाल जैनुल एबाद खान का है। धरना देने आये सेवा मुक्त डाक पाल खान के अनुसार वह बीती 27 जुलाई 2016 को सेवा मुक्त हो गया था। उसके बाद से अब तक उसको विभाग से मिलने वाली धनराशि में एक फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हो सकी। उसने बताया कि आला अधिकारी ने उसे हथगाम बुलाया और जब वह वहां पहुंचा तो नहीं मिला। खागा में भी बुला कर नहीं मिला। वह आला अधिकारी के रवैये से परेशान हो गया इसलिए आज उसने मुख्य डाक घर में डाक अधीक्षक के कक्ष के सामने परिवार सहित धरना देकर न्याय की गुहार लगाई। उसका कहना है कि सेवा निवृत्ति की धनराशि नहीं दिये जाने के पीछे उससे मांगी गयी अवैध रकम का नहीं दिया जाना है। डाक अधीक्षक हरिशंकर लाल से जब इस मामले पर बात की गयी तो उनका कहना था कि उनके संज्ञान में ही प्रकरण नहीं रहा, जबकि हर विभागाध्यक्ष के सामने उसके अधीन सेवा मुक्त होने वाले कर्मचारी का पूरा डाटा होता है। भुगतान नहीं किये जाने के सवाल पर उन्होने कहा कि कर्मचारी ने उन्हें कोई प्रार्थना पत्र अब तक नहीं दिया था। अब मामला संज्ञान में आया है तो इसकी जांच करायी जायेगी और कर्मचारी को उसके देयकों का भुगतान किया जायेगा।

वहीं बात अगर नियम की करें तो डाक विभाग में ग्रामीण डाक सेवकों को लेकर जारी नियम 5 दिसम्बर 2001 को गौर करें तो नियोक्ता अधिकारी को कर्मचारी की सेवा समाप्ति की तीन माह पहले ही लिखित रूप से सभी देयकों के भुगतान का आवेदन लेना चाहिये और सेवा निवृत्ति की तिथि पर ही उसके सारे देयकों को भुगतान किया जाना चाहिये। डाक अधीक्षक के इस नियम की अनदेखी करना उनके कर्तव्य बोध के बावत स्पष्ट तो करता है। साथ ही विभाग की कारगुजारियों का भी खुलासा करता है।

 -मुमताज़ अहमद