9 अप्रैल तक जवाब दें जस्टिस कर्णनः सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तलब किए जाने के बाद शुक्रवार को कोलकाता हाईकोर्ट के जज जस्टिस कर्णन सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। जहां जस्टिस कर्णन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनकी शिकायतों का निपटारा कभी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि वो कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं लड़ रहे बल्कि आम लोगों के कल्याण की लड़ाई लड़ रहे हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कर्णन से से अपना पक्ष मौखिक या लिखित रखने के सवाल पर जस्टिस कर्णन ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिले तो वो प्रमाण भी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि वो निर्दोष हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि अवमानना का मामला मेरिट पर तय होना चाहिए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की बेंच ने कई बार जस्टिस कर्णन को अपना वकील रख कर मामले की कायदे से सुनवाई करने की हिदायत दी। मगर उन्होंने साफ इंकार करते हुए कहा कि मुझे बिना नोटिस न्यायिक कार्यों से रोका गया है जो गलत है, वो मांफी नहीं मांगेंगे।

इस पर अटार्नी जनरल ने कहा कि जस्टिस कर्णन जो कह रहे हैं ये उन्हें पता है। ऐसे में उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही चलेगी। साथ ही उन्होंने बीते 25 मार्च को लिखे कर्णन के पत्र को पढ़ते हुए कहा कि माफीनामा शर्तों के साथ नहीं आता।

वहीं सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि ये इतना आसान नहीं है। जब जस्टिस कर्णन को जमानती वारंट जारी किया गया था तो उन्होंने सात जजों का इस्तीफा मांगा और नोटिस को गैरकानूनी बताया था। इस पर जस्टिस कर्णन ने कहा कि मैं एक संवैधानिक पद पर हूं, एक सम्मानित व्यक्ति हूं लेकिन पुलिस एक अभियुक्त के यहां गई थी संवैधानिक दफ्तर में नहीं गई थी। आप हमारे न्यायिक काम को शुरु करने दीजिए। जिसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि हम आपको कुछ और समय दे रहे हैं और नौ अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करिए।

इस दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन के न्यायिक कार्यों को बहाल करने से इनकार किया। जस्टिस कर्णन ने कहा कि अगर उनका न्यायिक कार्य बहाल नहीं होता है तो उन्हें जेल भेज देना चाहिए। साथ ही, कर्णन ने कहा कि अगर उनका न्यायिक कार्य बहाल नहीं किया गया, तो वे अगली तारीख पर नहीं आएंगे।