सरोजनी नायडू के बारे में जाने ये खास बातें..

नई दिल्ली। सरोजनी नायडू के जन्म हैदराबाद में हुआ था। इनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय एक नामी विद्वान तथा माँ कवयित्री थीं और बांग्ला में लिखती थीं। सरोजनी नायडू का बचपना से ही कला और कविता के प्रति काफी रूझान था वो पढ़ाई में भी बहुत कुशाग्र थी। यही वजह थी कि उन्होंने सिर्फ 12 साल की उम्र में ही 12वीं की कक्षा पास कर ली थी। बहुमुखी प्रतिभा की धनी सरोजिनी नायडू की अनेक उपलब्धियों में कुछ खास बांते जानकर आप भी उनकी प्रतिभा को सराहे बिना नहीं रह पाएंगे-

– सरोजिनी नायडू एक मशहूर कवयित्री, स्वतंत्रता सेनानी और अपने दौर की महान वक्ता भी थीं। उन्हें भारत कोकिला के नाम से भी जाना जाता था।

– भारत कोकिला कही जाने वाली सरोजिनी नायडू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थीं। आजादी के बाद वो पहली महिला राज्यपाल भी घोषित हुईं।

 

सरोजनी नायडू ने सिर्फ 13 साल की उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था, उनकी पहली कविता का नाम ”लेडी ऑफ दी लेक” है जो उन्होंने 13 साल में लिखा था।

– ”गोल्डन थ्रैशोल्ड” उनकी पहली कविता संग्रह का नाम था, उनके दूसरे तथा तीसरे कविता संग्रह बर्ड ऑफ टाइम तथा ब्रोकन विंग ने उन्हें एक सुप्रसिद्ध कवयित्री बना दिया।

– उन्हें 1947 में में स्वतंत्र भारत में के उत्तर प्रदेश के पहली राज्यपाल के रूप में भी चुना गया था।

– इसके अलावा उन्होंने देश की आजादी में भी जमकर भाग लिया, इसी सिलसिले में वो 1942 के ‘चले जाव’ आंदोलन में उन्होंने हिस्सा लिया और जेल भी गईं।

–  19 साल की आयु में, पढाई खत्म करने के बाद वे डॉक्टर गोविंदराजुलू नायडू से मिली, जिनसे कुछ समय के बाद उन्होंने शादी कर ली। वो समय ऐसा था जब इंटर-कास्ट मैरिज एक बड़ी बात थी लेकिन उनके पिता ने समाज की परवाह न करते हुए इस शादी के लिए हां कह दी थी।

– ‘गोलमेज कांफ्रेंस’ में महात्मा गांधी के प्रतिनिधि मंडल में सरोजिनी नायडू भी सम्मिलित हुई थी और उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

– सरोजिनी नायडू की जब 2 मार्च सन् 1949 को मृत्यु हुई तो उस समय वह राज्यपाल के पद पर ही थीं। लेकिन उस दिन मृत्यु तो केवल देह की हुई थी। अपनी एक कविता में उन्होंने मृत्यु को कुछ देर के लिए ठहर जाने को कहा था…

मेरे जीवन की क्षुधा, नहीं मिटेगी जब तक
मत आना हे मृत्यु, कभी तुम मुझ तक।

– सरोजिनी नायडू को ‘भारत कोकिला’, ‘राष्ट्रीय नेता’ और ‘नारी मुक्ति आन्दोलन की समर्थक’ के रूप में सदैव एक अलग स्थान दिया गया है।

– सरोजनी नायडू की प्रमुख कविताओं में से एक कविता कि कुछ पक्तियां इस प्रकार है।

नजर आ चुके हैं, पुराने जा रहे हैं।

अतीत एक पर्वतकोष बन जाता है, जहाँ एकांत में यादें बसती हैं।
प्रतिष्ठित, शांत, भूली हुईं लेकिन उत्सुक दिलों की, जो नई आकाँक्षाओं को
पूरा करने के लिए पुरानी आकाँक्षाएँ भूलने को बेताब है।