पढ़िए आरुषि हत्याकांड की पूरी केस हिस्टरी….

इलाहाबाद। नोएडा के चर्चित आरुषि और हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। डबल ंमर्डर में आरोपी आरुषि के माता-पिता को कोर्ट ने आज सबूतो के आभाव में रिहा कर दिया। बता दें कि उन्हें साल 2013 में सीबीआई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। तलवार दंपत्ति ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कि थी, इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सबूतों के अभाव में ये फैसला सुनाया है। वहीं कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर ये सवाल खड़ा हो गया है कि अगर आरुषि और हेमराज को तलवार दंपत्ति ने नहीं मारा तो फिर उनकी हत्या किसने की।

 

आरुषि हत्याकांड देश का सबसे चर्चित केस है। नौ साल बीतने के बाद भी आजतक आरुषि और हेमराज को इंसाफ नहीं मिल पाया है। आरुषि की हत्या में आरोपित हुए उसके  माता-पिता के रिहा होने के बाद एक बार फिर इस केस की परथे या तो दोबारा खुलेगी या फिर इस केस को दरकिनार कर दिया जाएगा। खैर ये तो अभी दूर की कौड़ी है कि सीबीआई इस फैसले के बाद क्या रुख अख्तियार करती है।

 

क्या है आरुषि हत्याकांड की पूरी कहानी 

16 मई 2008 को नोएडा के पॉश इलाके जलवायु विहार में उस समय खलबली मच गई जब शहर के मशहुर डेंटिस्ट राजेश तलवार और नुपुर तलवार की बेटी का सर कटा शव उनके घर में मिला।  इस मामले में जब कार्रवाई शुरू हुई तो सबूतों की सुई तलवार परिवार के नौकर हेमराज की तरफ घूम गई। लेकिन अगले दिन जब हेमराज का शव घर की छत पर मिला तो लगने लगा कि इस केस को सुलझाने में पुलिस के पसीने छुट जाएंगे और हुआ भी यहीं नौ साल बीत जाने के बाद भी आरुषि को इंसाफ की दरकार है। हेमराज का शव मिलने के बाद इस केस में दिल्ली पुलिस भी शामिल हो गई और दोनों शहरों की पुलिस ने मिलकर 19 मई 2008 को इस केस की छानबीन शुरू कर दी। मामले की जांच के बाद इसे पुलिस ने ऑनर किलींग करार देते हुए आरुषि के पिता राजेश तलवार से पूछताछ की।

पुलिस के मुताबिक राजेश ने अपनी बेटी आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक हालत में देखा, जिसके बाद वे अपना आपा खो बैठे और उन्होंने गुस्से में अपनी बेटी की हत्या कर दी। उस दौरान राजेश के दोस्तों ने पुलिस के इस शक को गलत बताते हुए कहा कि आप किसी भी साक्ष्य या फॉरेंसिक जांच के बिना कैसै किसी पर इतना भद्दा इलजाम लगा सकते हैं। तलवार के दोस्तों ने यूपी पुलिस पर इलजाम लगाते हुए कहा था कि पुलिस इस मामले से अपना पल्ला झाड़ने और अपनी नाकामी छिपाने के लिए राजेश तलवार को बली का बकरा बना रही है। आरुषि की हत्या के एक हफ्ते बाद पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार किया। जमानत मिलने से पहले 60 दिन तलवार को जेल में गुजारने पड़े थे। वहीं इस मामलें में परिवार वालों और दोस्तों के पुलिस पर सवाल खड़े करने के बाद उस समय उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने इस केस को सीबीआई के हवाले कर दिया था।

सीबीआई जांच के बाद उम्रकैद 

तत्कालिन मुख्यमंत्री मायावती के इस केस को सीबीआई के हाथ में सौंप देने के बाद सीबीआई ने इस केस की छानबीन शुरुआत से की। इस छानबीन के दौैरान केस में सनसनिखेज जानकारियां सामने आने लगी। इस मामले में सबसे हैरान कर देने वाली बात ये थी की सीबीआई के दो अलग-अलग जांचकर्ताओं के इस केस को लेकर अलग-अलग निष्कर्ष थे। अरुण कुमार की अगुवाई वाली पहली टीम ने पर्दाफाश करने का दावा किया था और इस केस में तलवार के कंपाउंडर कृष्णा और दो घेरलू नौकर राजकुमार और विजय मंजल  को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रहने के चलते तीनों आरोपियों को रिहा कर दिया गया।

चार्जशीट दाखिल न करने के चलते इस केस को साल 2009 में सीबीआई की दूसरी टीम को सौंप दिया गया। दूसरी टीम ने पहली जांच प्रक्रिया में खामिया दिखाते हुए इस केस की छानबीन नए तरीके से शुरू की। इस दौरान सीबीआई की टीम ने साक्ष्य के आधार पर राजेश तलवार को आरोपी पाया ,लेकिन उस दौरान वो सबूतों की कमी के चलते पुलिस के चुंगल से बच निकले। सीबीआई की विशेष अदालत ने जांचकर्ताओं की दलिल को ठुकरा दिया। सीबीआई ने इस मामले की एक बार फिर शुरू से जांच की और इस दौरान जो बात निकलकर सामने आई वो हैरान कर देने वाली थी। सीबीआई को जांच में पता चला की इस डबल मर्डर में राजेश के साथ आरुषि की मां नुपुर तलवार भी शामिल है।

जांचकर्ता टीम ने एक बार फिर अपने साक्ष्यों को सीबीआई की अदालत में पेश किया। इस बार साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई कोर्ट ने तलवार दंपत्ति पर मुकदमा चलाने के आदेश दे दिए।  इसके बाद चार साल की लंबी छानबीन के बाद 26 नवंबर 2013  को गाजियाबाद की सीबीआई कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को आजीवन कारावास की सजा सुना दी और तलवार दंपत्ति को गाजियाबाद की डासना जेल में बंद कर दिया गया। इसके बाद तलवार दंपत्ति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की। इस याचिका को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 11 जनवरी 2017 की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

इसके बाद 1 अगस्त 2017 को इस केस की परथ एक बार फिर खुली और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस फैसले पर दोबारा सुनवाई करने का फैसला लिया। फैसले पर दोबारा सुनवाई का फैसला लेने के बाद कोर्ट ने सात सिंतबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा और लंबे समय की लड़ाई के बाद कोर्ट ने तलवार दंपत्ति के पक्ष में अपना फैसला सुना दिया, कोर्ट ने सबूतों के अभाव में तलवार दंपत्ति को रिहा कर दिया और आरुषि हत्याकांड एक बार फिर मिस्ट्री बन गया।