‘राम तेरी गंगा मैली’ सफाई अभियान की पहल

फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के भदबा गांव के रहने वाले किसान नेता राजेंद्र सिंह छह सालों से मछलियों को गंगा में छोड़ने के अनवरत अभियान को चलाकर बेहद खुश हैं। दावा यह भी है की मछलियां छोड़ने से पूर्व में किए गए पाप धुल जाते हैं। परिवार में हर तरह की सम्पन्नता आती है तो डाली गई मछलियों से गंगा प्रदूषण मुक्त होती है।
गंगा को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के जहां बड़े बड़े दावे और प्रचार प्रसार किए गए वहीं जिले में एक ऐसा कारवां है जो छह सालों से बिना हो-हल्ला किए अपने अभियान को गति देने में जुटा है जिसके तहत खुद की जेब से पैसे खर्च कर गंगा में मछलियां डाल रहा है।

कारवां में जुड़े आस्थावानों की मानें तो जीवनदायिनी गंगा में मछलियां छोड़ने से बिगड़े काम बने हैं। काल के गाल में समां रहे लोगों को जीवनदान मिला है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के भदबा गांव के किसान नेता राजेंद्र सिंह बताते हैं कि उनकी पत्‍‌नी शकुंतला देवी बहुत बीमार हो गई। इलाज कराया, फायदा नहीं मिला। तभी गांव के सुभाष शुक्ल ने उनसे कहाकि मां गंगा में तुम समा‌र्थ्य के अनुसार मछलियां डालो। तुम्हारा काम बनेगा। गंगातट पहुंचे और मछलियां छोड़ी। स्वामी विज्ञानन्द जी का कहना है की दिखावे से कुछ नहीं होता गंगा में मछलियों के रहने से गंगा स्वच्छ रहती हैं। सरकारों को चाहिएं की इनके शिकार पर पुरी तरह रोक लगा दी जाए।

खागा तहसील से सत्तरह किलो मीटर दूर नौबस्ता गंगा घाट जहा गंगा किनारे गन्दगी का अम्बार हैं। इतनी गन्दगी शायद गंगा जी में कभी नहीं देखी गई होगी एक तरफ सरकार और समाज के सेवक गंगा की शुद्धता में लगे हुए हैं तो दूसरी तरफ समाज के ही लोग गंगा को गन्दी करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सवाल उनके ऊपर उठता हैं जो सामाजिक संगठन गंगा सफाई की बड़ी बड़ी बात तो करते हैं, मगर शायद अमली जामा पहनाना उनके बस की बात नहीं। उनकी अनदेखी और उनकी और सरकार की करनी कथनी पर हम नहीं यह तस्वीरें सवाल उठा रही हैं। क्या यही हमारी निर्मल गंगा हैं।

मुमताज़ इसरार