26 साल पहले कैसे रची गयी थी राजीव गांधी की हत्या की साजिश

नई दिल्ली।  21 मई 1991 का दिन कोई कैसे भूल सकता हैं आज के ही दिन देश ने सबसे युवा प्रधानमंत्री को खो दिया था।

राजीव गांधी

कैसे हुई राजीव गांधी की मौत?

कहां हुई राजीव गांधी की मौत?

क्या हुआ था 26 साल पहले?

इन सारे सवालों के जवाब आज हम आपकों बताएगें।

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी प्रभाकरण घने जंगलो के बीच राजीव गांधी की हत्या का साजिश रच रहा था और उसके साथ मौजूद थे चार लोग।
बेबी सुब्रह्मण्यम- हमलावरों के लिए ठिकाने का जुगाड़ करने की जिम्मेदारी इसको सौपी गयी थी।

मुथुराजा-हमलावरों के लिए संचार और पैसे की जिम्मेदारी इसको मिली थी और ये प्रभाकरण का खास था।

मुरुगन– विस्फोटक विशेषज्ञ, आतंक गुरू, हमले के लिए जरूरी चीजों और पैसे का इंतजाम इसे करना था।

शिवरासन-लिट्टे का जासूस, विस्फोटक विशेषज्ञ, राजीव गांधी की हत्या की पूरी जिम्मेदारी इसको सौंपी गयी थी।

प्रभाकरण से हत्या का फरमान लेने के बाद बेबी सुब्रह्मण्यम, मुथुराजा 1991 की शुरुआत में चेन्नई पहुचे। सबसे पहले वहां पहुचने पर ऐसे लोग को ढूढना था जो मकसद से अंजान होते हुए भी इन कामों में मदद करे। हत्या से पहले रुकने के लिए घर दे और छिपने का ठिकाना दे। एक तरफ बेबी सुब्रह्मण्यम चेन्नई में रहने के सुरक्षित ठिकाने बना रहा था तो मुथुराजा बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपनी क्रूर साजिश के लिए चुन रहा था। चेन्नई की शुभा न्यूज फोटो एजेंसी में काम करने वाले इन शैतानों के लिए वरदान बन गए थे। यहीं से मुथुराजा ने दो फोटोग्राफर रविशंकरन और हरिबाबू चुने।

रविशंकरन और हरिबाबू दोनो शुभा न्यूज फोटोकॉपी एजेंसी में बतौर फोटोग्राफर काम करते थे। हरिबाबू को नौकरी से निकाल दिया गया था। मुथुराजा ने हरिबाबू को विज्ञानेश्वर एजेंसी में नौकरी दिलाई. श्रीलंका से बालन नाम के एक शख्स को बुला कर हरिबाबू का शागिर्द बनाया। इससे हरिबाबू को काफी पैसा मिलने लगा और उसका झुकाव मुथुराजा की तरफ बढ़ने लगा। मुथुराजा ने अहसान के बोझ तले दबे हरिबाबू को राजीव गांधी के खिलाफ खूब भड़काया कि अगर वो 1991 के लोकसभा चुनाव में जीत कर सत्ता में आए तो तमिलों की और दुर्गति होगी।

राजीव की हत्या के लिए साजिश की एक एक ईंट जोड़ी जा रही थी। श्रीलंका में बैठे मुरूगन ने इस बीच जय कुमारन और रॉबर्ट पायस को चेन्नई भेजा। ये दोनों पुरूर के साविरी नगर एक्सटेंशन में रुके। यहां जयकुमारन का जीजा लिट्टे बम एक्सपर्ट अरीवेयू पेरूलीबालन 1990 से छिप कर रह रहा था। इन दोनों को श्रीलंका से चेन्नई भेजने का मकसद था अर्से से चुपचाप पड़े कंप्यूटर इंजीनियर और इलेक्ट्रॉनिक एक्सपर्ट अरीवेयू पेरूलीबालन को साजिश में शामिल करना ताकि वो हत्या का औजार बम बना सके। आगे चलकर पोरूर का यही घर राजीव गांधी हत्याकांड के प्लान का हेडक्वार्टर बन गया। यहीं से चलकर पूरी साजिश श्रीपेरंबदूर तक पहुंची थी।

मुरुगन ने चेन्नई पहुंच कर बहुत रफ्तार में साजिश को अंजाम की ओर लाने की कोशिशें तेज कीं। मुरूगन के इशारे पर जयकुमारन और पायस. नलिनि-भाग्यनाथन-बेबी-मुथुराजा के ठिकाने पर पहुंच गए। राजीव गांधी विरोधी भावनाएं लोगों के दीमाग में भरी जाने लगीं। नलिनी राजीव गांधी के खिलाफ पूरी तरह तैयार हो गयी थी. नलिनि जिस प्रिटिंग प्रेस में नौकरी करती थी वहां छप रही एक किताब सैतानिक फोर्सेस ने उसके ब्रेनवॉश में अहम भूमिका निभाई। ब्रेनवॉश के साथ मुरूगन ने हत्यारों की नकली पहचान तैयार करने के लिए जयकुमारन और पायस की मदद से फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया।

मुरूगन, मुथुराजा और बेबी ने मिलकर चेन्नई में छिपने के तीन महफूज ठिकाने खोज लिए। अरवियू के तौर पर एक बम बनाने वाला तैयार था. राजीव के खिलाफ नफरत से भरे नलिनी पदमा और भाग्यनाथन की ओट तैयार थी। शुभा सुब्रह्मण्यम जैसा आदमी मुहैया कराने वाला तैयार था। अब शिवरासन को संदेशा भेजा गया. मार्च की शुरूआत में वो समुद्र के रास्ते चेन्नई पहुंचा. वो पोरूर के इसी इलाके में पायस के घर में रुका।

12 मई 1991 को शिवरासन-धनू ने पूर्व पीएम वीपी सिंह और डीएमके सुप्रीमो करूणानिधि की रैली में तिरुवल्लूर के अरकोनम में हुई इस रैली में धनू वीपी सिंह के बेहद पास तक पहुंची उसने उनके पैर भी छुए। बस बम का बटन नहीं दबाया पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की रैली में सुरक्षा का स्तर राजीव की सुरक्षा के बराबर न सही तो कम भी नहीं था पर शिवरासन और धनू के शातिर इरादे कामयाब रहे इससे शिवरासन के हौसले बुलंद हो गए और उसे अपना प्लान कामयाब होता दिखने लगा।

लोकसभा चुनाव का दौर था राजीव गांधी की मीटिंग 21 मई को श्रीपेरंबदूर में तय हो गई। शिवरासन ने पलक झपकते ही तय कर लिया कि 21 को ही साजिश पूरी होगी। 20 की रात शिवरासन नलिनि के घर रैली के विज्ञापन वाला अखबार लेकर पहुंचा और तय हो गया कि अब 21 को ही साजिश पूरी होगी।

नलिनी के घर 20 मई की रात धनू ने पहली बार सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए चश्मा पहना। शुभा ने धानू को बेल्ट पहना कर प्रैक्टिस करवाई और श्रीपेरंबदूर में किस तरह साजिश को अंजाम तक पहुंचाना है इसकी पूरी तैयारी मुकम्मल कर ली गई. सभी पूरी तरह शांत और मकसद के लिए तैयार थे। 20 मई की रात को सभी ने साथ मिलकर फिल्म देखी और सो गए। सुबह हुई तो पांच लोग शिवरासन-धनू-शुभा-नलिनी और हरिबाबू साजिश को पूरा करने के लिए तैयार थे।

रैली के गर्मागर्मी के बीच राजीव गांधी को आने में देरी हे रही थी। बार-बार ऐलान हो रहा था कि राजीव गांधी रैली में किसी भी वक्त पहुंच सकते हैं। राजीव गांधी के खिलाफ पक रही साजिश अंजाम के बेहद करीब थी। एक महिला सब इंस्पेक्टर बार बार नलिनी को राजीव गांधी के पास आने से रोक रही थी, लेकिन राजीव गांधी की उस महिला पर नजर पड़ी और उन्होनें कहा पास आने दो सबको पास आने का मौका मिलना चाहिए। नलिनी, राजीव गांधी के पास आयी उनको माला पहनाई जैसे ही झुक कर पैर छुई एक धमाका हुआ और 6 महीने से रची जा रही साजिश पूरी हो गयी।
धमाके के तुरंत बाद शिवरासन चेन्नई की ओर भागा नलिनी और सुधा उससे चेन्नई में आकर मिलें। शिवरासन ने सुधा से बताया कि हरिबाबू तो मारा गया पर उसका कैमरा वही पकड़ा गया कैमरो में मिले सुरागो से राजीव गांधी के हत्यारों को जांच दल तक पहुंचा दिया।

राजीव गांधी की पुण्य तिथि

 

   सृष्टि विश्वकर्मा…