इलाहाबाद: रेल प्रबंधक ने राष्ट्रभाषा हिंदी पर दिया जोर

देश में इन दिनों लोग अंग्रेजी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। सभी लोग अपनी मातृभाषा को छोड़ कर अंग्रेजी भाषा को ओर अग्रसर होने लग रहे हैं। ऐसे में इलाहाबाद में मंडल रेल प्रबंधक संजय कुमार पंकज ने मंडल राष्ट्र भाषा कार्यांन्वयन समिति की त्रैमासिक बैठक में मंडल ने राष्ट्रभाषा हिंदी के कार्यान्वयन के लिए किये जा रहे प्रयासों की सराहना की है। साथ ही उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों से हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग लगातार करते रहने का आवाह्न किया।


संजय कुमार ने राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल देते हुए कहा कि राष्ट्रभाषा कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई जाए और राष्ट्रभाषा की बैठकों मे न सिर्फ ब्रांच ऑफिसर बल्कि जूनियर ऑफिसर तथा अधीक्षक स्तर के कर्मचारियों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएं। बैठक मे मंडल रेल प्रबंधक ने मंडल की राजभाषा पत्रिका रेल त्रिवेणी तथा तथा फोटो पत्रिका निहारिका का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में अपर मंडल रेल प्रबंधक ने इलाहाबाद मंडल पर सरकारी कार्य की विभिन्न मदों में हिंदी मे किये जा रहे कार्यों एवं विशेष उपब्धियों की चर्चा की। बैठक का संचालन वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी ने किया।

वही दूसरी तरफ अहमदाबाद के साबरमती गांधी आश्रम में महात्मा गांधी के जीवन पर बनी पुस्तक का लोकार्पण के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमारे देश में लोग अंग्रेजी भाषा के पीछे पड़े हुए हैं लेकिन हमे हमारी हिंदी भाषा पर गर्व होना चाहिए। वेंकैया नायडू का कहना है कि देश में अंग्रेजी भाषा के पीछे लोग भागने में लगे हुए हैं। लेकिन लोगों को अपनी मातृ भाषा पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी भाषा हमारी पहचान है, लेकिन फिर भी लोग अंग्रेजी की पीछे भाग रहे हैं। यह कापी दुर्भाग्यपूर्ण बात है। साबरमती गांधी आश्रम में वेंकैया नायडू ने अपनी मातृभाषा पर लोगों को जोर देने के लिए कहा। शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू का कहना है कि गांधी जी के जीवन पर आधारित इस किताब में किसी को भी अपनी समस्या के सामाधान के कैसे निकलना है, यह सब बाते इस किताब में बता रखी है। आपको बता दें कि इससे पहले भी वेंकैया नायडू ने हिंदी भाषा का बयान किया था। उन्होंने सांसदों को लिखने के साथ ही बोलने के लिए भी कहा था। वेंकैया नायडू ने कहा है कि हिंदी ही भारतीय की असली पहचान है।