हां मिला मैं चीनी राजदूत से राहुल ने भरी हामी

नई दिल्ली। भारत और चीन की तकरार के बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की चीन के राजदूत लो जेवाई से मुलाकात को पहले ‘फर्जी’ करार देने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने स्वयं स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने बीते हफ्ते चीनी राजदूत लुओ झाओहुई से मुलाकात की थी।

राहुल गांधी ने एक के बाद एक तीन ट्वीट कर चीन के राजदूत लो जेवाई से मुलाकात पर सफाई देते हुए कहा अगर मेरे एक राजदूत से मिलने से सरकार इतनी चिंतित है, तो उसे बताना चाहिए कि सीमा पर तनाव के बीच 3 मंत्री चीन क्यों पहुंचे। गंभीर मुद्दों के बारे में जानना मेरा काम है।

मैं चीनी राजदूत, पूर्व एनएसए, नॉर्थ ईस्ट के कांग्रेस नेताओं और भूटान के राजदूत से मिला राहुल।‘
पहले इसे छुपा कर बाद में सफाई क्यों दी केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा, ‘अगर एक कांग्रेस नेता चीनी राजदूत से मिलते हैं तो इसमें सीक्रेट क्या है? उन्होंने पहले इसे छुपा कर बाद में सफाई क्यों दी। चीनी दूतावास के अनुसार भारत में चीन के राजदूत लो जेवाई ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से 8 जुलाई को मुलाकात की थी। इस मुलाकात में दोनों के बीच भारत और चीन के संबंधों की वर्तमान स्थित पर चर्चा हुई।
सोमवार के घटनाक्रम पर नजर डालें तो इससे पहले कांग्रेस ने अपने बयानों से किनार कर यूट टर्न लेते हुए मान लिया था कि राहुल गांधी चीन के राजदूत से मिले। अब तक पार्टी इसे स्वीकार नहीं कर रही थी।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘सिर्फ चीनी राजदूत ही राहुल गांधी से नहीं मिले, बल्कि भूटान के राजदूत ने भी उनसे मुलाकात की, कई राजदूत वक्त-वक्त पर कांग्रेस अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से मुलाकात करते रहते हैं।
सुरजेवाला ने कहा, ‘प्रधानमंत्री चाइनीज प्रीमियर से मिले विशेष तौर से हैम्बर्ग में, इसके बावजूद कि चीन ने वार्ता करने से मना किया, वो ब्रिक्स मीट अटेंड करके आए।‘
वहीं, शाम को संवददाता सम्मेलन में तिवारी ने सफाई देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में अपनी कार्यशैली के अनुसार कांग्रेस उपाध्यक्ष बहुत लोगों से मिलते हैं। जिसमें कूटनीतिज्ञ, बाहरी देशों के राजदूत भी होते हैं। इसी तरह वह चीन और भूटान के राजदूत से मिले थे।

वह भारत के भूतपूर्व सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन से भी मिले थे।
उन्होंने कहा, ‘आज जो लोग इस बात से उत्ते्जित हो रहे हैं. वे सरकार से पूछें की पीएम खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग से क्यों मिलने गए थे जबकि चीन ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि कोई भी द्विपक्षीय वार्ता संभव नहीं है। वहीं प्रकाश जावड़ेकर, जेपी नड्डा, महेश शर्मा चीन में क्या कर रहे थे. सरकार से इस तरह से आप पूछे तो सच्चाई पता चलेगी।’
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी मामलों में भारत सरकार के द्वारा देश के हित में किए गये कार्य का कांग्रेस समर्थन करती हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले सप्ताह जर्मनी के हैम्बर्ग में जी20 सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सीमा विवाद का मुद्दा क्यों नहीं उठाया? राम्या ने सम्मेलन में मोदी और शी की तस्वीर को साझा करते हुए ट्वीट कर कहा, ‘चीन की घुसपैठ हो रही है और इस दौरान यह बैठक हुई और ‘कमजोर’ प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे के बारे में बात करना भी मुनासिब नहीं समझा।
राम्या ने एक और ट्वीट में कहा, ‘अगर कांग्रेस उपाध्यक्ष ने चीनी राजदूत से मुलाकात की है तो भी मुझे यह कोई मुद्दा नहीं लगता। लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा निजी और सार्वजनिक तौर पर सीमा विवाद को नहीं उठाना मुद्दा जरूर है।‘
दरअसल पिछले सप्ताह राहुल गांधी ने ट्विटर के जरिए चीन मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया था। राहुल गांधी ने कहा था, ‘हमारे प्रधानमंत्री चीन विवाद पर क्यों चुप हैं इस बीच एक बार फिर चीनी दूतावास ने ये बयान हटा दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने भारत ने भूटान के डोका ला इलाके में चीन का सड़क निर्माण रोक दिया था। इसके बाद से ही चीन बॉर्डर पर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। चीन ने नाथू ला में भारतीय सेना के कई बंकर उड़ा दिए जिसके चलते कैलाश मानसरोवर की यात्रा प्रभावित हो गई है। इतना ही नहीं चीन ने भारत को अपनी सेना वापस बुलाने को कहते हुए युद्ध की धमकी भी दी है। वहीं भारतीय सेना ने चीन के सड़क निर्माण को अपनी सुरक्षा पर खतरा बताते हुए पीछे हटने से इनकार कर दिया है