खाकी पर उठे सवालिया निशान, पीड़ित को नही मिल रहा न्याय

फतेहपुर। सूबे में निजाम बदला और कानून के रखवाले खाकी की हनक को सरकार के एक्शन प्लान पर दिखाने में जुट गए लेकिन उन पीड़ितों का क्या होगा जो अपनी गरीबी के दंश से न्याय के लिए भटक रहे है। जी हां आपको बताते है फतेहपुर जिले  की एक ऐसी कहानी जिसमे पुलिस और आरोपियों का गठजोड़ खुला दिखाई पड़ता है, पीड़ित परिवार की लाडली बेटी को पहले दहेज के लिए प्रताड़ना दी गई और जब उसने हक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो उसका अपहरण ही करके गायब कर दिया गया, इतना ही नही पुलिस ने ऐसा किरदार निभाया की परिजनों पर ही झूठा इल्जाम मढ दिया।एक नही सुनी और महज गुमशुदगी में रिपोर्ट दर्ज कर ली, एक माह बीत गए लेकिन पीड़ित परिवार को न्याय नही मिला |

मामला फतेहपुर जिले के गाजीपुर थाने के फुलावामऊ गांव का है जहां घर के बाहर बैठा बूढ़ा दम्पति जो अपनी लाडली बेटी के घर वापस आने के लिए इंतजार कर रहा है लेकिन शायद कुदरत के यहाँ भी इसकी अर्जी मंजूर नही हुई। परिवार में दस लोगो का कुनबा ऊपर से गरीबी का बोझ और अब लाडली बेटी के अपहरण की वारदात ने इस पुरे परिवार को झकझोर दिया है। हकीकत से आपको रूबरू करा दे, दरवाजे के बाहर बैठे गोरे लाल और उसकी पत्नी ने सुमन देवी ने अपनी बड़ी बेटी रानी की शादी हिन्दू रीती रिवाज के अनुसार कुछ दिनों पहले ही सदर कोतवाली के पीरनपुर इलाके में कर दी। शादी के बाद कुछ दिनों में ही ससुराल के लोगो ने दहेज माग शुरू कर दी। मांग पूरी न होने पर प्रताड़ना शुरू कर दी, नतीजतन बेटी की इस जुल्म से परेशान यह परिवार बेटी को अपने घर ले आया और कोर्ट से गुहार लगा दी जिससे ससुराली जन आक्रोशित हो गये |

पीड़ित परिवार की माने तो 8 फरवरी को उनकी बेटी घर से पास में ही दादी के पास गई थी। इस बीच उसका पति देवर भी गांव में दो बाइको से आया था, घर से दादी के पास गई बेटी देर रात तक वापस नही आई। परिजनों ने खोजबीन की लेकिन कोई सुराग न मिलने पर थाने गये लेकिन पुलिस का अंदाज ही कुछ और था ..पुरे एक सप्ताह तक थाने के चक्कर लगाने के बाद इस परिवार को बेटी के अपहरण की रिपार्ट दर्ज करने के बजाय सीधे गुमशुदगी दर्ज कर दी उसके बाद से आज तक परिवार के पास पुलिस ताप्तिश करने तक नहीं गई जिससे परिवार परेशान है तो पुलिस की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए है। पुलिस ये कोई कहानी नही ऐशे अनेक फरियादी घूम रहे है जिनका पिछली सरकारों में एफआईआर ही नही लिखी गई और यदि दर्ज भी गई तो आईपीसी की धराए ही बदल दी गई ऐसे में अब सूबे का निजाम बदलने के बाद पीड़ित को न्याय मिल पायेगा इस पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है । वहीं इस घटना के बारे में पुलिस ने बताया की परिजनों की तहरीर पर पहले गुमशुदगी दर्ज की गई थी ,परिजनों के आरोप के बाद गुमशुदगी का मुकदमा अपहरण में तरमीम कर जांच की जा रही हैं ।

 -मुमताज़ अहमद