यूपी विस चुनावः डिंपल पर भारी पड़ती दिख रहीं हैं प्रियंका

कानपुर। यूपी की सत्ता पाने के लिए कांग्रेस और सपा में गठबंधन तो हो गया है लेकिन इस गठबंधन की राह उतनी आसान नहीं है जितनी आसान दिख रही है उतनी आसान नहीं है। कांग्रेस और सपा को एक कराने वाली महिलाओं में अब वर्चस्व की जंग छिड़ती नजर आ रही है। दरअसल डिंपल यादव और प्रियंका गांधी कानपुर की महाराजपुर सीट पर दोनों अपनी साख मान चुकी थी। जिसके कारण कांग्रेस से राजराम पाल व सपा से अरुणा तोमर दमदारी से चुनावी मैदान में जुटे रहे। आखिरकार चली प्रियंका की ही और अरुणा को मैदान छोड़ना पड़ा।

गठबंधन के तहत पहले कानपुर जनपद की 10 सीटों में चार सीट कांग्रेस के खाते में गईं। जिसके बाद सपा ने बची हुई छह सीट पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिया। लेकिन प्रियंका यादव के करीबी पूर्व सांसद व वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष महाराजपुर सीट से पर्चा दाखिल कर गठबंधन में पेंच फसा दिया। जिसके बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कानपुर में संयुक्त रैली की और पदाधिकारियों के साथ बैठक भी की। पर इस सीट को लेकर कोई हल नहीं निकल सका और सपा की अरुणा तोमर व कांग्रेस के राजाराम बराबर क्षेत्र में अपने को गठबंधन का प्रत्याशी बता प्रचार-प्रसार करते रहे। मतदान नजदीक आता देख दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं की बैठक हुई और राजाराम के नाम पर मुहर लग गई। कांग्रेस नगर अध्यक्ष हर प्रकाश अग्निहोत्री व सपा नगर अध्यक्ष फजल महमूद ने बताया कि महाराजपुर सीट से गठबंधन के प्रत्याशी राजाराम होगें और अरुणा अब चुनाव नहीं लड़ेंगी। जिससे यह बात साफ हो गई कि प्रियंका गांधी सांसद डिंपल यादव पर भारी पड़ गईं।

डिंपल की जनसभा

सांसद डिंपल यादव बीते दिनों पार्टी प्रत्याशी अरुणा तोमर के पक्ष में नौबस्ता के रेसकोर्स मैदान में चुनावी जनसभा भी कर चुकी हैं। डिंपल ने जनसभा में एलान किया था कि गठबंधन की प्रत्याशी अरुणा ही रहेगीं। जिसके बाद यह कयास लगाया जा रहा था कि राजाराम को मैदान छोड़ना पड़ सकता है।

कानपुर देहात की भोगनीपुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी व जिलाध्यक्ष नीतम सचान के पक्ष में चुनावी जनसभा करने लोकसभा में विपक्ष के नेता व प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद आ रहें है। यही नहीं प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर भी सचान के पक्ष में मजबूती से खड़े है और वह भी प्रचार करने आ रहें है। जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि नीतम सचान को गठबंधन के तहत चुनावी मैदान मिल सकता है।