ये तीन देवियां लगाएंगी महागठबंधन की नइया पार!

कांग्रेस और सपा का विलय होते ही दोनों पार्टियों ने चुनावी रण में अपना 100 फीसदी देने और मैदान में बाजी मारने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है। एक छोर पर राहुल गांधी और अखिलेश यादव कमान संभालेंगे तो दूसरी तरफ प्रियंका गांधी और डिंपल यादव चुनावी कमान संभालने के लिए तैयार है। गठबंधन के लिए ऐसा पहली बार हुआ है कि जब कांग्रेस की तरफ से चुनावों के लिए प्रियंका इतनी एक्टिव रही है। इससे पहले वो चुनावी जनसभा करती रही हैं लेकिन इस बार यूपी विधानसभा चुनावों में प्रियंका ज्यादा ही रूचि लेती नजर आ रही है एक तरफ कांग्रेस के लिए प्रियंका मैदान में है तो दूसरी तरफ समाजवादी की ओर से डिंपल यादव पहले के मुकाबले काफी सक्रिय नजर आ रही है।

प्रियंका यूपी के मसलों में काफी रूचि दिखा रही हैं, वे अक्सर पार्टी के मीटिंग में शामिल हो रही हैं और अपने घर पर भी नेताओं से चर्चा कर रही हैं। प्रियंका की सक्रियता को देखते हुए कुछ लोगों का मानना है कि वो जल्द ही रण में पूरी तरह से एक राजनेता के रूप में उतरेंगी। जानकारों की मानें तो राहुल गांधी की खराब हो चुकी छवि को दोबारा बनाने का प्रयास ना करके एक नए चेहरे को लाना चाहती है, वो प्रियंका होंगी। इस गठबंधन की कमान सिर्फ दो ही महिलाओं के हाथों में ही नहीं है बल्कि तीसरी महिला का नाम भी इस लिस्ट में जुड़ गया है।

अगर बात गठबंधन की की जाए तो इसमें अहम भूमिका निभाने वाली भी यही दोनों महिलाएं है। जब गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई थी उस समय देर रात प्रियंका और डिंपल ने आपस में बातचीत की थी, जिसके बाद दोनों पार्टियों का विलय संभव हो पाया। बता दें कि अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव से एक बजे के करीब प्रियंका गांधी का फोन आया।
उन्होंने कहा कि अखिलेश ने फोन बंद किया हुआ है, लेकिन अखिलेश ने पहले ही कांग्रेस से कह रखा था कि गठबंधन की बात वे लोग डिंपल से कर सकते हैं।

बताया जा रहा है कि प्रियंका और डिंपल के बीच नजदीकियां बढ़ी हैं, जिसकी वजह से यह डील मुमकिन हो पाई है। इस गठबंधन के बाद यह भी तय हो गया है कि प्रियंका और डिंपल कई रैलियां एक साथ करेंगी। वहीं, दूसरी तरफ महागठबंधन की नइया को पार लगाने के लिए शीला दीक्षित चुनावी रण में उतरने के लिए तैयार हैं। अब ऐसे हालातों में कहा कि महागठबंधन की कमान तीन देवियों के हाथों में है तो इसमें कोई दो राय नहीं है। अब ये तीन देवियां महागठबंधन के लिए कितना लकी साबित होती है ये तो चुनाव के परिणाम बताएंगे।