प्रधानमंत्री को सीरियस लीजिए तो लाइन में लगिए और भुगतिएः आजाद

गोंडा। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ब्यान पर पीएम के हंसी उड़ाने व जनता के हंसने के सवाल पर कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व यूपी प्रभारी गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सीरियस लेना है तो भुगतिए जो भुगत रहे हैं, फिर शोर क्यों करते हैं। इसी पर वो आगे बोले कि इसमें हंसने वालों की कमी है न कि राहुल की।  कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करने गुरूवार को गोंडा पहुंचे और विपक्षी पार्टियों पर जमकर निशाना साधा। सपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि आज़म खान ने कहा जनता एहसान फरामोश होती है, मैं पहली बार सुन रहा हूँ, जनता सबसे चालाक होती है, मैं इससे इत्तेफाक नहीं रखता हूं।

उन्होंने कहा कि जनता सबसे समझदार होती है और सबको लम्बी ढील देती है और उसके बाद खींच लेती है। गुलाम नबी आज़ाद आज कांग्रेस द्वारा स्थानीय रामलीला में आयोजित चुनावी जनसभा को सम्बोधित करने पहुंचे थे। हालांकि वे जनसभा में श्रोताओं के टोंटे से पूरी तरह जोशहींन दिखे। काफी कम भीड़ देख मात्र 15 मिनट का भाषण दे नबी चलते बने।
इस बीच उन्हें माइक से ही खराश की समस्या हो गई, उनका गला रुंध गया और खांशी आने लगी। वे बोले माइक गन्दी होती है , इसमें धूल होती है। बोलने में सांस खींचते समय यह धूल अंदर आती है। कृषि व किसान प्रधान उत्तर प्रदेश व देश में उनकी इस नाज़ुक अदा की खासी चर्चा रही। नोटबन्दी के चलते 150 से ज्यादा मौतें होने की बात कहते हुए गुलामनबी ने कहा कि इससे पूर्व तीन चार देशों में नोटबन्दी हुई। किन्तु वहां सभी प्रकार के नोट पर्याप्त संख्या में छापने व बैंकों में पहुंचाने के बाद नोटबन्दी का एलान हुआ किन्तु यहां एलान के बाद नोटों की छपाई हुई जबकि देश में छपाखानों की जो छमता है।
उससे 9-10 माह में पर्याप्त नोंट छप पाएगा, तो ये दुष्वारियां हो रही हैं, मौते हो रही हैं और ये समस्या 6 माह, साल भर और इससे आगे भी बरकरार रहेगी नुक्सान होगा। वे बोले प्रधानमंत्री के निर्णय से देश 10-15 साल पीछे चला गया।
विशाल सिंह, संवाददाता